ईरान को लेकर अमेरिका ने कूटनीतिक संकेत दिए, सैन्य कार्रवाई टलने के संकेत

Team The420
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ईरान को लेकर अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि सैन्य कार्रवाई अनिवार्य नहीं है। वॉशिंगटन ने कूटनीतिक समाधान की संभावना की ओर इशारा किया है, हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव अब भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। यह संकेत ऐसे समय आए हैं, जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई गई है और तेहरान की ओर से कड़ी चेतावनियां जारी की जा रही हैं कि किसी भी हमले की स्थिति में अमेरिकी ठिकानों और सैन्य परिसंपत्तियों को निशाना बनाया जाएगा।

गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि बल प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस बयान को हाल के दिनों में अपनाए गए सख्त रुख से अलग माना जा रहा है, खासकर उस चेतावनी के बाद, जिसमें कहा गया था कि ईरान के लिए “समय समाप्त होता जा रहा है।”

ये टिप्पणियां ऐसे वक्त सामने आई हैं, जब पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियां तेज हुई हैं और एक बड़ा बेड़ा क्षेत्र में तैनात किया गया है। वॉशिंगटन ने इस कदम को एहतियाती बताया है, लेकिन ईरान इसे उकसावे की कार्रवाई मान रहा है और उसने किसी भी सैन्य हमले के खिलाफ लगातार चेतावनियां दी हैं।

ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अगर उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई होती है, तो वह अमेरिकी सैन्य अड्डों और क्षेत्र में तैनात युद्धपोतों पर सीधे जवाबी हमले करेगा। इन बयानों ने पहले से तनावग्रस्त क्षेत्र में हालात और बिगाड़ने की आशंका बढ़ा दी है, जहां पहले ही कई संघर्ष, समुद्री मार्गों में अस्थिरता और कमजोर युद्धविराम की स्थिति बनी हुई है।

कूटनीतिक हलकों का कहना है कि अमेरिकी बयानबाजी इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन दबाव और संवाद के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। एक ओर सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बातचीत के रास्ते खुले रखे जा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या अप्रत्याशित टकराव से बचा जा सके।

विश्लेषकों के मुताबिक, यह दोहरी रणनीति इस चिंता को दर्शाती है कि अगर सीमित स्तर पर भी सैन्य कार्रवाई हुई, तो वह तेजी से एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती है, जिसमें कई देश और गैर-राज्य तत्व शामिल हो सकते हैं।

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इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है। तेल बाजारों में बेचैनी बनी हुई है और कच्चे तेल की कीमतें हाल के हफ्तों में कई महीनों के उच्च स्तर के आसपास कारोबार कर रही हैं। निवेशक उस जोखिम को कीमतों में शामिल कर रहे हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी संभावित व्यवधान से जुड़ा है, जहां से दुनिया के तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान से जुड़ा कोई भी संघर्ष ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक महंगाई पर सीधा असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी रुख में नरमी का संकेत सहयोगी देशों और घरेलू जनमत को भी संदेश देने की कोशिश हो सकता है, जहां पश्चिम एशिया में एक और लंबे सैन्य हस्तक्षेप को लेकर चिंता बढ़ रही है। पहले से ही वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में नए संघर्ष के लिए बहुत कम सहमति दिख रही है।

हालांकि, वॉशिंगटन ने यह भी साफ किया है कि अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो सभी विकल्प खुले रहेंगे। अमेरिका का कहना है कि उसका लक्ष्य उन गतिविधियों को रोकना है, जिन्हें वह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानता है, हालांकि सार्वजनिक रूप से किसी स्पष्ट ‘रेड लाइन’ को रेखांकित नहीं किया गया है।

ईरान ने अपने रुख में कहा है कि वह दबाव की राजनीति के तहत बातचीत नहीं करेगा। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका सैन्य धमकियों को कूटनीतिक दबाव के औज़ार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि संवाद तभी संभव है, जब उसकी संप्रभुता और सुरक्षा हितों का सम्मान किया जाए।

क्षेत्रीय जानकारों के अनुसार, आने वाले दिन यह तय करने में अहम होंगे कि मौजूदा गतिरोध में नरमी आती है या हालात और सख्त होते हैं। भारी हथियारों से लैस सेनाओं की नज़दीकी मौजूदगी किसी भी छोटी घटना को बड़े संकट में बदल सकती है, भले ही दोनों पक्ष सीधे टकराव से बचना चाहते हों।

यूरोप और एशिया की कई राजधानियों में भी इस स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। कई देशों ने संयम बरतने और दीर्घकालिक कूटनीति की अपील की है। जिन देशों के पश्चिम एशिया से आर्थिक हित जुड़े हैं, वे पर्दे के पीछे तनाव कम करने के प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।

फिलहाल, अमेरिकी संदेश यही दिखाता है कि वह सैन्य तैयारी बनाए रखते हुए भी कूटनीतिक रास्ते बंद नहीं करना चाहता। यह रणनीति सफल होती है या नहीं, यह काफी हद तक तेहरान के संकेतों और दोनों पक्षों की टकराव से पीछे हटने की इच्छा पर निर्भर करेगा।

जैसे-जैसे पर्दे के पीछे बातचीत आगे बढ़ रही है, पूरा क्षेत्र सतर्क बना हुआ है और बाजार, सरकारें तथा सुरक्षा एजेंसियां हालात पर करीबी निगरानी रखे हुए हैं। बातचीत में किसी भी तरह का ठहराव या ज़मीन पर हुई कोई चूक, मौजूदा संतुलन को तेजी से संकट में बदल सकती है।

आने वाले दिनों में कूटनीतिक संपर्क और सैन्य तैनाती के साथ घटनाक्रम और तेज़ होने की संभावना है।

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