विदेश यात्रा के दौरान नकद लेन-देन, कार्ड सीमाओं और मुद्रा विनिमय की जटिलताओं से जूझते भारतीय पर्यटकों के लिए राहत की खबर है। जापान ने भारत के लोकप्रिय डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को ट्रायल आधार पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत भारतीय पर्यटक जापान में अपने भारतीय बैंक खातों से जुड़े UPI ऐप के जरिए QR कोड स्कैन कर भुगतान कर सकेंगे।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब जापान में भारतीय पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। वर्ष 2025 में जापान आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या 3.15 लाख से अधिक रही, जिससे भारत जापान के सबसे तेजी से बढ़ते पर्यटन स्रोत देशों में शामिल हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सहज और भरोसेमंद डिजिटल भुगतान सुविधा उपलब्ध होने से भारतीय यात्रियों का खर्च करने का अनुभव और सरल हो सकता है।
इस पायलट प्रोजेक्ट पर जापान की आईटी सर्विसेज कंपनी एनटीटी डेटा और भारत की नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। दोनों संस्थाएं भारतीय और जापानी भुगतान प्रणालियों के बीच तकनीकी एकीकरण के विकल्प तलाश रही हैं, ताकि सीमा पार डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित और सुचारु बनाया जा सके। ट्रायल के सफल रहने पर इस व्यवस्था का दायरा आगे बढ़ाया जा सकता है।
UPI एक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जो मोबाइल ऐप के माध्यम से तुरंत धनराशि ट्रांसफर करने की सुविधा देती है। इसमें बैंक खाता संख्या साझा करने की आवश्यकता नहीं होती और QR कोड स्कैन कर, UPI आईडी या मोबाइल नंबर के जरिए भुगतान किया जा सकता है। भारत में इस प्रणाली ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े रिटेल स्टोर्स तक कैशलेस लेन-देन को आम बना दिया है।
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जापान में UPI ट्रायल से वहां के कारोबारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। भारतीय पर्यटकों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान होने से खरीदारी और सेवाओं पर खर्च बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय बाजारों को नए उपभोक्ता मिल सकते हैं और डिजिटल भुगतान संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन और ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह पहल कैशलेस ट्रैवल को नई गति दे सकती है। विदेशी मुद्रा बदलवाने, कार्ड ब्लॉक होने या अतिरिक्त शुल्क जैसी समस्याओं से भारतीय सैलानियों को काफी हद तक राहत मिलेगी। साथ ही, भारत और जापान के बीच पर्यटन, तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
UPI की शुरुआत भारत में 2016 में हुई थी और बीते एक दशक में इसने देश में डिजिटल भुगतान की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। आज रोजाना करोड़ों लेन-देन UPI के जरिए हो रहे हैं। जापान जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश में इसका ट्रायल शुरू होना, इस प्रणाली की विश्वसनीयता और वैश्विक क्षमता को रेखांकित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में UPI को अन्य देशों में भी लागू किया जा सकता है। इससे भारतीय यात्रियों के लिए विदेशों में भुगतान और आसान होगा और भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल वैश्विक मंच पर और मजबूत पहचान बना सकता है।
