यूपी में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य: 1 फरवरी से लागू होगा नया नियम

Team The420
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लखनऊ | उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 1 फरवरी 2026 से राज्य भर में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया जाएगा। नए प्रावधान के तहत रजिस्ट्रेशन के समय खरीदार, विक्रेता और गवाहों की बायोमेट्रिक पहचान कराई जाएगी।

राज्य सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी दस्तावेजों, बेनामी सौदों, पहचान की हेराफेरी और जमीन कब्जे से जुड़े मामलों में बड़ी कमी आएगी। बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में प्रॉपर्टी विवादों और जाली रजिस्ट्रेशन से जुड़े मामलों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

नए नियम के अनुसार, किसी भी संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के दौरान संबंधित पक्षों को आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। बिना सफल प्रमाणीकरण के न तो दस्तावेज़ स्वीकार किए जाएंगे और न ही रजिस्ट्रेशन पूरा माना जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में मौजूदा डिजिटल सिस्टम के साथ जोड़ी जाएगी, ताकि पहचान सत्यापन तत्काल हो सके।

अब तक कई मामलों में यह देखा गया है कि फर्जी गवाहों, नकली पहचान पत्रों और दूसरे व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्रेशन के जरिए जमीन-मकान के सौदे कर दिए जाते थे। नई व्यवस्था से इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

भूमि विवादों पर अंकुश की कोशिश

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में दीवानी अदालतों में लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा जमीन और संपत्ति विवादों से जुड़ा हुआ है। इनमें से कई विवादों की जड़ गलत या धोखाधड़ी से किए गए रजिस्ट्रेशन होते हैं। आधार प्रमाणीकरण से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति की पहचान रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज होगी, जिससे भविष्य में विवाद की स्थिति में जांच आसान होगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भूमि रिकॉर्ड सुधार और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। इससे न केवल विवाद घटेंगे, बल्कि निवेशकों और आम नागरिकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

डिजिटल ट्रांजैक्शन को मिलेगा बढ़ावा

नई व्यवस्था से प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन में डिजिटल ट्रैकिंग मजबूत होगी। आधार प्रमाणीकरण के साथ रजिस्ट्रेशन होने से डेटा की एकरूपता, रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और ऑडिट ट्रेल मजबूत होगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे भविष्य में किसी भी सौदे की जांच या सत्यापन के लिए स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

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राज्य सरकार पहले ही स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन विभाग में कई डिजिटल सुधार लागू कर चुकी है। आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य करने का फैसला इन्हीं सुधारों की अगली कड़ी माना जा रहा है।

नागरिकों के लिए क्या बदलेगा

नए नियम लागू होने के बाद नागरिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि रजिस्ट्रेशन के समय सभी पक्षों का आधार विवरण सही और अपडेटेड हो। बायोमेट्रिक सत्यापन में किसी भी तरह की त्रुटि होने पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अटक सकती है। ऐसे में अधिकारियों ने लोगों से पहले से दस्तावेज़ों की जांच और तैयारी करने की सलाह दी है।

हालांकि, कुछ नागरिक संगठनों ने बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के दौरान तकनीकी दिक्कतों और डेटा गोपनीयता से जुड़े सवाल भी उठाए हैं। प्रशासन का कहना है कि सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि केवल पहचान सत्यापन किया जाएगा और निजी डेटा का दुरुपयोग नहीं होगा।

फर्जीवाड़े पर सख़्त संदेश

प्रशासनिक जानकारों के मुताबिक, यह फैसला जमीन-माफियाओं और फर्जी रजिस्ट्रेशन में शामिल गिरोहों के लिए सख़्त संदेश है। आधार प्रमाणीकरण से पहचान छिपाकर सौदे करना लगभग असंभव हो जाएगा, जिससे अवैध गतिविधियों पर असर पड़ेगा।

राज्य सरकार का दावा है कि नए नियम लागू होने के बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी। आने वाले महीनों में इसके प्रभाव का आकलन कर जरूरत पड़ने पर और सुधार किए जा सकते हैं।

1 फरवरी से लागू होने वाले इस बदलाव के साथ उत्तर प्रदेश उन राज्यों की कतार में शामिल हो जाएगा, जहां प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को तकनीक के जरिए अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

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