वैश्विक व्यापार राजनीति में एक निर्णायक मोड़ पर कनाडा ने चीन के साथ किसी भी फ्री ट्रेड डील को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि बीजिंग के साथ किसी भी व्यापक व्यापार समझौते की स्थिति में कनाडाई निर्यात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
कनाडा का यह रुख अमेरिका-कनाडा-मेक्सिको व्यापार समझौते (USMCA/CUSMA) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। ओटावा ने स्पष्ट किया है कि इस त्रिपक्षीय समझौते के तहत वह किसी तीसरे देश के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने से पहले अपने साझेदार देशों को सूचित करने और उनके हितों का सम्मान करने के लिए बाध्य है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और कनाडा के रिश्ते पहले से ही तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। हाल के हफ्तों में राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा पर चीन के लिए अमेरिकी बाजार में “बैकडोर एंट्री” देने का आरोप लगाया था। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऐसी किसी भी कोशिश का जवाब कठोर टैरिफ के रूप में दिया जाएगा।
कनाडा के इस कदम से चीन के साथ संभावित आर्थिक सहयोग को लेकर बनी अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। हालांकि, इसी महीने 16 जनवरी को दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक व्यापारिक समझौता हुआ था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को तेज कर दिया था।
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उस प्रारंभिक समझौते के तहत कनाडा हर साल लगभग 49,000 चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपेक्षाकृत कम टैरिफ पर अपने बाजार में प्रवेश देने पर सहमत हुआ था। इसके बदले चीन ने कनाडा के कुछ प्रमुख कृषि उत्पादों पर शुल्क में राहत देने का संकेत दिया था।
यह घटनाक्रम उस पृष्ठभूमि में सामने आया है, जब अक्टूबर 2024 में कनाडा ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ को 100 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था। जनवरी में हुए समझौते में चीन ने कैनोला सीड ऑयल पर टैरिफ को 85 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने और कैनोला मील, लॉब्स्टर, केकड़े व मटर जैसे उत्पादों पर 2026 के अंत तक अतिरिक्त शुल्क न लगाने का आश्वासन दिया था।
राष्ट्रपति ट्रंप की ताज़ा टैरिफ चेतावनी के बाद कनाडा ने अपने कदम पीछे खींच लिए। व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल चीन-कनाडा संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर उत्तरी अमेरिका के व्यापार संतुलन, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और निवेश धारणा पर भी पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, कनाडा के सामने रणनीतिक संतुलन की चुनौती है। एक ओर चीन के साथ आर्थिक अवसर हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका के साथ उसका सबसे बड़ा और संवेदनशील व्यापारिक रिश्ता। USMCA के तहत हर साल अरबों डॉलर का व्यापार दांव पर है।
चीन के साथ फ्री ट्रेड डील से दूरी बनाकर कनाडा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे टकराव का जोखिम नहीं लेना चाहता। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि यह कदम अस्थायी रणनीति है या वैश्विक व्यापार दिशा में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
