150 दिन के लिए 10% वैश्विक आयात शुल्क, भारत सहित निर्यातक देशों पर असर संभव

सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप का टैरिफ दांव

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By Roopa
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नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से रेसिप्रोकल टैरिफ नीति रद्द होने के कुछ घंटों के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए अधिकांश आयातित वस्तुओं पर 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। नया आयात सरचार्ज 24 फरवरी से लागू होकर 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा, जब तक इसे पहले समाप्त नहीं किया जाता या कांग्रेस इसकी अवधि बढ़ाने की मंजूरी नहीं देती। इस कदम को प्रशासन ने बैलेंस ऑफ पेमेंट्स घाटे को नियंत्रित करने और टैरिफ से होने वाली आय बनाए रखने की रणनीति बताया है।

व्हाइट हाउस के अनुसार अमेरिका इस समय गंभीर बाहरी असंतुलन का सामना कर रहा है—लगातार दो वर्षों से करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर का वस्तु व्यापार घाटा, जीडीपी का 4% चालू खाता घाटा और जीडीपी के मुकाबले लगभग माइनस 90% का नेट अंतरराष्ट्रीय निवेश संतुलन। प्रशासन का तर्क है कि ये संकेत वित्तीय स्थिरता और निवेशक विश्वास के लिए जोखिम पैदा करते हैं, जिसके कारण अस्थायी आयात सरचार्ज जरूरी हो गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदली रणनीति

इससे पहले 6–3 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया था। 10% से 50% तक के वे शुल्क कनाडा, मैक्सिको, चीन, ब्राज़ील और भारत सहित कई देशों पर लागू थे। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने वैधानिक अधिकारों से आगे जाकर कार्रवाई की। फैसले के बाद आयातकों के लिए अरबों डॉलर की संभावित रिफंड का रास्ता खुल गया है, हालांकि अंतिम निर्णय निचली अदालतों को करना है। इन टैरिफ के खिलाफ 1,500 से अधिक कंपनियों ने चुनौती दी थी।

धारा 122 से मिला अस्थायी रास्ता

धारा 122 राष्ट्रपति को बैलेंस ऑफ पेमेंट्स संकट की स्थिति में बिना कांग्रेस की पूर्व मंजूरी के 150 दिनों तक अधिकतम 15% आयात सरचार्ज लगाने का अधिकार देती है। हालांकि इसके आगे विस्तार के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी, जहां डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसदों का विरोध चुनौती बन सकता है। ट्रेजरी अधिकारियों का कहना है कि वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के जरिए 2026 में टैरिफ से होने वाली कुल आय लगभग स्थिर रखी जाएगी।

किन वस्तुओं पर लागू होगा शुल्क

घोषित 10% एड वेलोरम ड्यूटी अधिकांश आयातित वस्तुओं पर मौजूदा कस्टम ड्यूटी के अतिरिक्त लगेगी। हालांकि कुछ रणनीतिक क्षेत्रों को छूट दी गई है, जिनमें क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस सामान और चुनिंदा कृषि उत्पाद शामिल हैं।
US–Mexico–Canada समझौते के तहत आने वाला व्यापार ड्यूटी-फ्री रहेगा, जबकि Section 232 के तहत पहले से टैरिफ झेल रहे उत्पादों पर अतिरिक्त सरचार्ज नहीं लगाया जाएगा।

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आगे देश-विशेष टैरिफ की तैयारी

प्रशासन ने यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) को Section 301 के तहत नई जांच शुरू करने का निर्देश दिया है, जिससे भविष्य में देश-विशेष टैरिफ लगाए जाने की संभावना बढ़ गई है। संकेत हैं कि यह कदम व्यापक आर्थिक असंतुलन को सुधारने के साथ-साथ रणनीतिक क्षेत्रों में दबाव बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

भारत और वैश्विक व्यापार पर असर

भारत जैसे निर्यात-उन्मुख देशों के लिए यह फैसला अल्पकालिक जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर उन सेक्टरों में जो छूट सूची में शामिल नहीं हैं। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 150 दिन की अस्थायी अवधि के बावजूद यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन में अनिश्चितता बढ़ाएगा और प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ तनाव को जन्म दे सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उठाया गया यह कदम दिखाता है कि अमेरिकी प्रशासन कानूनी सीमाओं के भीतर रहते हुए भी आक्रामक व्यापार नीति जारी रखने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है। कांग्रेस की मंजूरी और संभावित देश-विशेष टैरिफ की दिशा में होने वाले अगले फैसले वैश्विक व्यापार के लिए निर्णायक साबित होंगे।

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