बैंकिंग धोखाधड़ी PIL पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अनिल अंबानी को फिर नोटिस

Team The420
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नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उद्योगपति अनिल अंबानी और उनके समूह अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) को एक जनहित याचिका (PIL) के संबंध में नए सिरे से नोटिस जारी किए हैं। इस याचिका में समूह की कंपनियों पर बड़े पैमाने पर बैंकिंग और कॉरपोरेट धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को निर्देश दिया कि वे दस दिनों के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें, ताकि अब तक की जांच की प्रगति का आकलन किया जा सके।

जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि इस मामले में अनिल अंबानी और ADAG को पहले भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। यह याचिका 18 नवंबर 2025 को पूर्व केंद्रीय सचिव ई. ए. एस. सरमा द्वारा दायर की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह नया नोटिस अंतिम अवसर माना जाएगा और संबंधित पक्षों को आरोपों पर अपना लिखित जवाब दाखिल करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी निर्देश दिया कि सभी पक्षों को नोटिस की विधिवत तामील सुनिश्चित की जाए और अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई करीब दस दिन बाद निर्धारित की गई है।

PIL में लगाए गए आरोप

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि ADAG और उससे जुड़ी कंपनियों ने लंबे समय तक सार्वजनिक धन का दुरुपयोग, बैंक फंड का डायवर्जन और धोखाधड़ीपूर्ण कॉरपोरेट प्रथाओं को अंजाम दिया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत में दलील दी कि जांच एजेंसियों ने अब तक इस मामले में बैंकों, ऑडिटर्स और संबंधित अधिकारियों की संभावित भूमिका की पर्याप्त जांच नहीं की है।

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भूषण ने इस प्रकरण को “भारत के इतिहास की सबसे बड़ी कॉरपोरेट धोखाधड़ियों में से एक” बताते हुए कहा कि यद्यपि CBI ने 2025 में भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर एक प्राथमिकी दर्ज की थी, लेकिन कथित अनियमितताएं कई वर्षों पहले से चली आ रही हो सकती हैं। याचिका में अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है।

CBI और ED से स्टेटस रिपोर्ट तलब

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि CBI और ED को ADAG और उसकी कंपनियों से जुड़े मामलों में अब तक की जांच की विस्तृत जानकारी सीलबंद रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करनी होगी। यह निर्देश याचिकाकर्ता द्वारा जांच की दिशा और गंभीरता पर उठाए गए सवालों के बाद दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस PIL पर केंद्र सरकार, CBI, ED, अनिल अंबानी और ADAG से जवाब मांगा था, लेकिन उस समय सुनवाई पूरी नहीं हो सकी थी। अब नए नोटिस के साथ अदालत ने मामले को आगे बढ़ाने और जांच पर न्यायिक निगरानी को मजबूत करने के संकेत दिए हैं।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कथित धोखाधड़ी में वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर, बैंक ऋण का दुरुपयोग और संस्थागत स्तर पर मिलीभगत के तत्व शामिल हो सकते हैं। यह मामला प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका और जवाबदेही को लेकर व्यापक सार्वजनिक बहस से भी जुड़ा माना जा रहा है।

आगे की राह

अब सभी की निगाहें CBI और ED की स्टेटस रिपोर्ट तथा अनिल अंबानी और ADAG की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाबों पर टिकी हैं। अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि मौजूदा जांच पर्याप्त है या फिर कोर्ट-मॉनिटरिंग को और सख्त किया जाएगा।

कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस, बैंकिंग जवाबदेही और नियामकीय निगरानी के लिहाज से दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

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