शामली | उत्तर प्रदेश के शामली में साइबर क्राइम पुलिस और साइबर सेल यूनिट ने ₹1.7 करोड़ के अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए एक दंपती को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक फर्जी टेलीग्राम निवेश चैनल के जरिए देश के 11 राज्यों के 41 लोगों से ठगी की और धनराशि को एक बैंक खाते के माध्यम से घुमाकर निकाला।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांक प्रशांत कंव और उनकी पत्नी सुरभि भार्गव के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि दोनों ने खुद को एडवरटाइजिंग और कास्टिंग प्रोफेशनल बताकर लोगों का भरोसा जीता और अपने फरार सहयोगियों के साथ मिलकर ठगी की साजिश को अंजाम दिया। हिमांक कंव मुंबई का निवासी है, जबकि सुरभि भार्गव शामली की रहने वाली बताई जा रही है।
म्यूल अकाउंट के जरिए धन का लेन-देन
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने शामली की एक बैंक शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया, जिसका इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में किया गया। इसी खाते के जरिए बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना समेत 11 राज्यों के पीड़ितों से ठगी गई रकम को रूट किया गया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, खाते में पैसा आने के बाद उसे अलग-अलग तरीकों से निकाला जाता था, ताकि ट्रेसिंग मुश्किल हो सके। अब तक की जांच में यह सामने आया है कि कुल ठगी की रकम में से करीब ₹98.4 लाख पहले ही निकाले जा चुके थे।
फर्जी निवेश पोर्टल का जाल
शामली पुलिस के अनुसार, आरोपियों और उनके सहयोगियों ने एक टेलीग्राम चैनल बनाया, जिसे आकर्षक निवेश प्लेटफॉर्म के तौर पर प्रचारित किया गया। लोगों को कम समय में अधिक मुनाफे का लालच दिया गया और उन्हें एक बोगस निवेश पोर्टल के लिंक पर पैसे जमा करने के लिए प्रेरित किया गया।
जैसे ही पीड़ित निवेश के नाम पर रकम ट्रांसफर करते थे, पैसा सीधे शामली स्थित बैंक खाते में पहुंच जाता था। शुरुआती दौर में कुछ पीड़ितों को मामूली रिटर्न दिखाकर भरोसा कायम किया गया, जिसके बाद उनसे बड़ी रकम जमा करवाई गई।
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दिल्ली कनेक्शन और फरार आरोपी
पूछताछ के दौरान हिमांक कंव ने पुलिस को बताया कि उसकी संलिप्तता की शुरुआत एक फिल्म प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाने के दौरान हुई थी। इसी दौरान उसकी पहचान एक शॉर्ट फिल्ममेकर के जरिए दिल्ली निवासी हर्षित उर्फ ऋतिक से हुई।
पुलिस का कहना है कि हर्षित ने ही बैंक अकाउंट खुलवाने की व्यवस्था की और उसके संचालन पर नियंत्रण रखा। वही ठगी की रकम के लेन-देन को मैनेज करता था। फिलहाल हर्षित समेत अन्य सहयोगी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
41 शिकायतें, राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्ज
शामली के पुलिस अधीक्षक के अनुसार, इस खाते से जुड़ी 41 शिकायतें केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज पाई गई हैं। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य जुटाए और आरोपियों तक पहुंच बनाई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर फ्रॉड नेटवर्क का दायरा और भी बड़ा हो सकता है, क्योंकि कई लेन-देन अब भी जांच के दायरे में हैं।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
इस मामले में दंपती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 61(2) (आपराधिक साजिश) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस के अनुसार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं और ठगी की शेष राशि की रिकवरी के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क के जरिए अन्य फर्जी खातों का भी इस्तेमाल किया गया था।
साइबर ठगी को लेकर चेतावनी
अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर मिलने वाले निवेश ऑफर्स से सतर्क रहें। पुलिस के अनुसार, बिना पुख्ता जानकारी और अधिकृत दस्तावेजों के किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराने से न केवल रकम की रिकवरी की संभावना बढ़ती है, बल्कि संगठित साइबर ठगी नेटवर्क तक पहुंचने में भी मदद मिलती है।
