फर्जी फर्म बनाकर करीब ₹2 करोड़ की जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह का एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में भंडाफोड़ हुआ है। टीम ने शनिवार को हथौड़ा चौराहे के पास से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी बिल, बिल्टी और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार मामले की शुरुआत 28 नवंबर को हुई, जब जीएसटी सचल दल को ‘प्रमोद एंटरप्राइज’ नाम से जारी संदिग्ध ई-वे बिल और परिवहन दस्तावेज मिले। जांच में कूट रचित इनवॉइस और फर्जी बिल्टी के जरिए राजस्व चोरी का खुलासा हुआ। इसके बाद रोजा थाने में मुकदमा दर्ज कर एसआईटी गठित की गई और जांच गैंगस्टर सेल को सौंपी गई।
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अखिलेश (रायबरेली), विपिन (बदायूं, वर्तमान निवासी गाजियाबाद), शिवओम शर्मा (मुजफ्फरनगर) और राहुल राणा (शामली) के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनके आधार और पैन कार्ड की प्रतियां लेता था और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्म का पंजीकरण करा देता था। बाद में इन फर्मों के नाम पर फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह स्क्रैप लदे ट्रकों की आवाजाही दिखाकर फर्जी ई-वे बिल तैयार करता था, जबकि वास्तविक माल का कोई अस्तित्व नहीं होता था। इससे बड़ी मात्रा में जीएसटी की चोरी की जा रही थी।
पुलिस ने बताया कि गिरोह ने ‘ब्रदर्स लॉजिस्टिक’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था, जिसमें फर्जी दस्तावेज साझा किए जाते थे और ट्रकों की काल्पनिक मूवमेंट की योजना बनाई जाती थी। इसी डिजिटल नेटवर्क के जरिए बिल, बिल्टी और ई-वे बिल तैयार कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के मोबाइल फोन से कई संदिग्ध दस्तावेज और चैट मिली हैं, जिनसे अन्य फर्जी फर्मों और संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी मिली है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
पुलिस का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में न केवल कर चोरी होती है बल्कि निर्दोष लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग भी किया जाता है, जिससे भविष्य में उन्हें कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए लोगों को अपने पहचान पत्र किसी भी अज्ञात व्यक्ति या संस्था को देने से बचने की सलाह दी गई है।
एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी चोरी के इस नेटवर्क की वित्तीय परतों की जांच की जा रही है और संबंधित विभागों को भी सूचना दी गई है ताकि फर्जी फर्मों का पंजीकरण निरस्त कर आगे की कार्रवाई की जा सके।
मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और संभावित लाभार्थियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
