अडानी पर SEC जांच

अदाणी पर SEC की अगली चाल, अदालत से मांगी वैकल्पिक अनुमति

Team The420
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नई दिल्ली/न्यूयॉर्क | अमेरिका का शीर्ष बाजार नियामक यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) अदाणी समूह के चेयरमैन गौतीम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी को कानूनी समन (लीगल समन्स) तामील कराने के लिए वैकल्पिक रास्ता अपनाने की अनुमति अदालत से मांग रहा है। यह जानकारी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सामने आई है, हालांकि भारतीय बिज़नेस चैनल CNBC-TV18 ने इस रिपोर्ट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, एसईसी ने न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित जिला न्यायालय में एक आवेदन दाखिल कर अनुरोध किया है कि वह पारंपरिक राजनयिक माध्यमों के बजाय समन की सेवा के लिए वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाने की अनुमति दे। अमेरिकी नियामक का तर्क है कि भारत के जरिए कानूनी नोटिस तामील कराने के उसके प्रयास अब तक सफल नहीं हो पाए हैं, जिससे मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

भारतीय माध्यमों से समन तामील में कठिनाई का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, एसईसी ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग की स्थापित प्रक्रियाओं के तहत भारतीय सरकारी चैनलों के माध्यम से गौतीम और सागर अदाणी को समन भेजने की कई कोशिशें कीं। हालांकि, इन प्रयासों में सफलता नहीं मिलने का दावा किया गया है। एसईसी का कहना है कि सीमा-पार कानूनी प्रक्रियाएं अक्सर जटिल और समयसाध्य होती हैं, जिससे जांच और नियामकीय कार्रवाई में देरी हो सकती है।

नियामक ने अदालत को यह भी बताया है कि यदि समन की सेवा में लगातार बाधाएं बनी रहती हैं, तो इससे न केवल जांच की गति प्रभावित होगी, बल्कि मामले को आगे बढ़ाने में भी व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा होंगी।

अमेरिकी वकीलों के जरिए नोटिस देने का प्रस्ताव

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार, एसईसी ने अदालत से यह अनुमति भी मांगी है कि वह अमेरिका स्थित उन कानूनी फर्मों को औपचारिक रूप से समन की सूचना दे सके, जो अदाणी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। रिपोर्ट में जिन लॉ फर्मों का उल्लेख किया गया है, उनमें किर्कलैंड एंड एलिस और क्विन इमैनुएल उर्कहार्ट एंड सुलिवन शामिल हैं। इसके अलावा, सागर अदाणी का प्रतिनिधित्व करने वाले एक अन्य कानूनी सलाहकार का भी जिक्र किया गया है।

एसईसी का तर्क है कि यदि इन अमेरिकी वकीलों को कानूनी रूप से समन की जानकारी दे दी जाती है, तो इसे यह माना जा सकता है कि संबंधित पक्षों को अदालत में चल रही कार्रवाई की औपचारिक सूचना मिल चुकी है। इससे आगे की सुनवाई और नियामकीय प्रक्रिया के लिए कानूनी आधार मजबूत हो सकता है।

एक वर्ष से जारी प्रयासों का उल्लेख

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसईसी के अनुसार, बीते लगभग एक वर्ष से गौतीम और सागर अदाणी से जुड़े मामलों में समन तामील कराने और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न राजनयिक और वैकल्पिक विकल्पों पर विचार किया गया। हालांकि, इन प्रयासों के विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

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इस घटनाक्रम पर अदाणी समूह की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बाजार पर तत्काल असर

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट सामने आने के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी पोर्ट्स, अदाणी ग्रीन एनर्जी और अदाणी पावर सहित समूह की कई प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियां दिन के निचले स्तरों के आसपास कारोबार करती नजर आईं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि किसी बड़े कारोबारी समूह से जुड़ी विदेशी नियामकीय खबरें निवेशकों की धारणा पर तुरंत असर डालती हैं, भले ही मामला इस समय केवल प्रक्रियात्मक चरण में ही क्यों न हो।

आगे की राह

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिकी अदालत एसईसी को वैकल्पिक सेवा प्रक्रिया अपनाने की अनुमति दे देती है, तो इसे यह माना जाएगा कि संबंधित पक्षों को कानूनी कार्रवाई की औपचारिक सूचना मिल चुकी है। इसके बाद मामले में अगली सुनवाई और आगे की नियामकीय प्रक्रिया का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल, निवेशकों, कानूनी जानकारों और बाजार सहभागियों की निगाहें अमेरिकी अदालत के अगले आदेश और अदाणी समूह की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। यह मामला वैश्विक नियामकीय जोखिमों और सीमा-पार कानूनी प्रक्रियाओं के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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