नई दिल्ली | भारत के बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने एक अहम रेगुलेटरी कार्रवाई करते हुए PwC और EY की भारतीय इकाइयों के वर्तमान और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों समेत कई व्यक्तियों पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। यह मामला 2022 में Yes Bank के बड़े शेयर बिक्री सौदे से जुड़ा है। यह जानकारी Reuters द्वारा देखे गए एक रेगुलेटरी नोटिस के आधार पर सामने आई है।
रेगुलेटर के मुताबिक, अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्मों Carlyle Group और Advent International के कुछ अधिकारियों पर भी अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील जानकारी (UPSI) साझा करने का आरोप है, जो भारतीय प्रतिभूति कानूनों के तहत इनसाइडर ट्रेडिंग के दायरे में आता है।
SEBI के आरोप क्या हैं
SEBI के नोटिस के अनुसार, कुल 19 व्यक्तियों के खिलाफ नियम उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। इनमें से सात लोगों पर UPSI के आधार पर ट्रेडिंग, जबकि चार पर ऐसी जानकारी साझा करने का आरोप है। इसके अलावा, PwC और EY के आठ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कमजोर आंतरिक अनुपालन (Compliance) प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि Advent International ने Yes Bank के शेयर ऑफर से पहले टैक्स एडवाइजरी सेवाओं के लिए EY को नियुक्त किया था और बैंक के मैनेजमेंट पर फीडबैक मांगा था। वहीं, Yes Bank ने अपने वैल्यूएशन कार्य के लिए EY मर्चेंट बैंकिंग सर्विसेज को जिम्मेदारी सौंपी थी। SEBI का मानना है कि इसी प्रक्रिया के दौरान संवेदनशील जानकारी साझा की गई।
2022 के शेयर ऑफर से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला जुलाई 2022 में Yes Bank के शेयर ऑफर से जुड़ा है, जिसमें Carlyle और Advent ने मिलकर बैंक की करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 1.1 अरब डॉलर में खरीदी थी। डील की सार्वजनिक घोषणा के अगले ही दिन, यानी 29 जुलाई 2022, Yes Bank के शेयरों में करीब 6 प्रतिशत की तेजी देखी गई थी।
SEBI का कहना है कि ऑफर से पहले शेयरों में हुई असामान्य ट्रेडिंग गतिविधियों ने जांच एजेंसी का ध्यान खींचा, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई।
नोटिस सार्वजनिक नहीं, जवाब की तैयारी
SEBI द्वारा जारी यह शो-कॉज नोटिस अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है और पहले इसकी रिपोर्टिंग भी नहीं हुई थी। मामले से परिचित दो लोगों के मुताबिक, जिन व्यक्तियों और कंपनियों पर आरोप लगाए गए हैं, वे फिलहाल SEBI को अपना जवाब तैयार कर रहे हैं। जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए इन सूत्रों ने नाम जाहिर न करने की शर्त रखी।
अब तक Advent, Carlyle, EY, PwC, Yes Bank और SEBI में से किसी की ओर से इस मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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SEBI का अगला कदम
विशेषज्ञों के मुताबिक, शो-कॉज नोटिस किसी भी जांच के बाद पहला औपचारिक नियामकीय कदम होता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो SEBI के पास भारी मौद्रिक जुर्माना, मार्केट से प्रतिबंध या अन्य दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है।
यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें ग्लोबल कंसल्टिंग फर्मों और प्राइवेट इक्विटी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों पर पूंजी जुटाने से जुड़े बड़े सौदे में इनसाइडर ट्रेडिंग का आरोप लगा है, जो भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत दुर्लभ है।
बाजार के लिए मायने
विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब भारत में पूंजी बाजार गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और वैश्विक निवेशक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत जैसे उभरते बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में SEBI की यह सख्त कार्रवाई बाजार में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
SEBI ने हाल के वर्षों में इनसाइडर ट्रेडिंग और बाजार में हेरफेर के खिलाफ अपना रुख सख्त किया है। हाल ही में नियामक ने एक अन्य मामले में Bank of America की भारत इकाई पर भी फंडरेजिंग प्रक्रिया के दौरान नियम उल्लंघन के आरोप लगाए थे।
आगे की राह
फिलहाल बाजार, निवेशकों और कानूनी विशेषज्ञों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरोपित पक्ष SEBI के नोटिस का क्या जवाब देते हैं और नियामक आगे क्या फैसला लेता है। यह मामला आने वाले समय में भारत के पूंजी बाजार में कंसल्टिंग फर्मों, निवेशकों और बैंकों की भूमिका को लेकर नए मानक तय कर सकता है।
