झारखंड में सबसे बड़ा एनकाउंटर: 15 नक्सली मारे गए, शीर्ष कमांडर खत्म

Team The420
4 Min Read

रांची, 22 जनवरी 2026 | झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को गुरुवार को बड़ी और निर्णायक सफलता मिली, जब पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा वन क्षेत्र में हुए भीषण एनकाउंटर में भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल दा उर्फ पतिराम मांझी मारा गया। इस मुठभेड़ में उसके साथ 14 अन्य नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

झारखंड पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 22 जनवरी 2026 की सुबह करीब छह बजे चाईबासा जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत कुंभडीह गांव के पास घने जंगलों में माओवादी दस्ते और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। खुफिया एजेंसियों को सटीक सूचना मिली थी कि अनल दा का दस्ता किसी बड़ी हिंसक वारदात की तैयारी में है। इसी आधार पर संयुक्त ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की गई।

संयुक्त बलों का घेराबंदी अभियान

खुफिया इनपुट के बाद झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा और जगुआर की टीमों ने इलाके की घेराबंदी की। सुबह शुरू हुई गोलीबारी कई घंटों तक चली। एनकाउंटर के बाद चलाए गए सर्च ऑपरेशन में कुल 15 शव बरामद किए गए, जिनमें एक की पहचान अनल दा के रूप में हुई है। अन्य मारे गए नक्सलियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

सर्च के दौरान एके-47, इंसास राइफल, एसएलआर, देसी हथियार, बड़ी मात्रा में कारतूस और दैनिक उपयोग का सामान बरामद किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह दस्ता लंबे समय से जंगल में सक्रिय था।

Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology

नक्सली नेतृत्व को बड़ा झटका

अनल दा उर्फ पतिराम मांझी गिरिडीह जिले का निवासी बताया जाता है और वर्षों से सारंडा क्षेत्र में सक्रिय था। वह भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी का सदस्य था और झारखंड-बिहार स्पेशल एरिया कमेटी में उसकी अहम भूमिका थी। उसके सिर पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह कई बड़े नक्सली हमलों की योजना और क्रियान्वयन में शामिल रहा।

इस ऑपरेशन के बाद झारखंड में अब केवल दो एक करोड़ के इनामी नक्सली बचे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अनल दा के मारे जाने से नक्सली नेटवर्क, कमांड स्ट्रक्चर और मनोबल को गहरा आघात पहुंचा है।

2025–26: निर्णायक चरण

झारखंड पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 नक्सल विरोधी अभियानों के लिहाज से अहम रहा। इस दौरान 32 नक्सली मारे गए, 30 ने आत्मसमर्पण किया और 279 को गिरफ्तार किया गया। 2001 से 2025 के बीच एनकाउंटर में मारे गए नक्सलियों की संख्या 235 तक पहुंच चुकी है। नक्सल गतिविधियां अब मुख्य रूप से सारंडा और कोल्हान तक सीमित रह गई हैं।

नक्सल-मुक्त झारखंड की ओर

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि 2026 की शुरुआत में ही इस बड़ी कार्रवाई से स्पष्ट है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है। केंद्र और राज्य सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक झारखंड को नक्सल-मुक्त घोषित करना है। आने वाले दिनों में बचे हुए शीर्ष इनामी नक्सलियों पर फोकस और तेज किया जाएगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article