संचार साथी का असर: साइबर फ्रॉड पर सरकार का डिजिटल वार, 1.52 करोड़ नंबर ब्लॉक

Team The420
6 Min Read

नई दिल्ली | साइबर धोखाधड़ी पर लगाम कसने की दिशा में भारत की कोशिशों को बड़ा बल मिला है। सरकार की संचार साथी पहल के तहत अब तक 1.52 करोड़ मोबाइल कनेक्शन ब्लॉक किए जा चुके हैं, जिन्हें अनधिकृत या संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ा पाया गया, यह जानकारी गुरुवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में सामने आई।

इसके अलावा, सत्यापन प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ियां पाए जाने पर करीब 2 करोड़ मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए गए हैं। यह कार्रवाई टेलीकॉम से जुड़े साइबर फ्रॉड पर बढ़ती निगरानी और सख्ती को दर्शाती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है, जिसके तहत फर्जी सिम से जुड़े 27 लाख व्हाट्सएप अकाउंट बंद किए गए हैं।

दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा शुरू किया गया संचार साथी पोर्टल अब देश के साइबर सुरक्षा ढांचे का एक अहम स्तंभ बनकर उभरा है। डिजिटल सेवाओं के तेज विस्तार और साइबर अपराध के बदलते तरीकों के बीच यह प्लेटफॉर्म नागरिकों की भागीदारी से धोखाधड़ी पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभा रहा है। शुरुआती दौर में ऐप को लेकर राजनीतिक बहस जरूर हुई, लेकिन इसके बावजूद आम लोगों के बीच इसका व्यापक उपयोग देखने को मिला है।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, संचार साथी पोर्टल पर अब तक लगभग 20 करोड़ हिट्स दर्ज किए गए हैं, जबकि इसका मोबाइल ऐप 2 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। यह देश के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले नागरिक-केंद्रित साइबर सुरक्षा टूल्स में शामिल हो गया है।

राजधानी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय संचार मंत्री ने संचार साथी को साइबर फ्रॉड के खिलाफ “मजबूत और भरोसेमंद डिजिटल सुरक्षा कवच” बताया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत का डिजिटल दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे तकनीक आधारित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत भी बढ़ती जा रही है।

बैकएंड इंटेलिजेंस और स्पूफ कॉल्स पर प्रहार

अधिकारियों के अनुसार, साइबर फ्रॉड की पहचान अब तेजी से बैकएंड इंटेलिजेंस सिस्टम्स पर आधारित हो रही है, जिनमें कई एजेंसियों से मिलने वाले इनपुट को जोड़ा जाता है। इस दिशा में ICORE जैसे प्लेटफॉर्म ने संगठित साइबर गिरोहों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार सक्रिय पाए गए हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले करीब 1.35 करोड़ स्पूफ कॉल्स रिकॉर्ड की जा रही थीं, जो अक्सर विदेशों से की जाती थीं लेकिन घरेलू नंबरों की तरह दिखाई देती थीं। इन कॉल्स की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय किए जाने के बाद स्पूफ कॉल ट्रैफिक में लगभग 95 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

अधिकारियों का कहना है कि संचार साथी के जरिए नागरिकों से मिलने वाली रिपोर्ट्स, डिजिटल फॉरेंसिक जांच और इंटेलिजेंस-आधारित विश्लेषण ने जटिल साइबर फ्रॉड नेटवर्क्स को समझने और उन पर तेज कार्रवाई में मदद की है।

Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology

फाइनेंशियल फ्रॉड अलर्ट और बैंकों से समन्वय

टेलीकॉम और साइबर सुरक्षा तंत्र का एक अहम हिस्सा फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर्स (FFRI) प्लेटफॉर्म भी है। यह सिस्टम रियल-टाइम में संदिग्ध लेनदेन की पहचान कर बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अलर्ट भेजता है, जिससे समय रहते कार्रवाई संभव हो पाती है।

करीब 800 से 900 बैंक और वित्तीय संस्थान, साथ ही विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियां इस प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इससे फिशिंग, सिम-स्वैप फ्रॉड और पहचान की चोरी जैसे मामलों में प्रतिक्रिया समय काफी कम हुआ है।

प्राइवेसी पर बहस और नीति में बदलाव

हालांकि, यह पहल पूरी तरह विवाद-मुक्त नहीं रही। पिछले संसद सत्र के दौरान स्मार्टफोन्स में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करने की सिफारिश को लेकर निजता और सहमति से जुड़े सवाल उठे थे। बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन का प्रस्ताव वापस ले लिया गया।

मंत्री ने कहा कि स्मार्टफोन्स में पहले से कई ऐप्स मौजूद होते हैं और उपयोगकर्ताओं को यह तय करने की पूरी स्वतंत्रता है कि वे कौन-से ऐप रखना या हटाना चाहते हैं। उन्होंने जोर दिया कि संचार साथी का उपयोग पूरी तरह स्वैच्छिक है।

डिजिटल सुरक्षा की बढ़ती भूमिका

आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि डिजिटल इंडिया के दौर में तकनीक, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं के बीच तालमेल लगातार मजबूत हो रहा है। साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच सरकार को उम्मीद है कि संचार साथी जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल इकोसिस्टम में भरोसा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल प्रो-एक्टिव और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां नागरिकों की भागीदारी, रियल-टाइम इंटेलिजेंस और अंतर-एजेंसी समन्वय साइबर अपराध से निपटने की रीढ़ बन रहे हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article