कबाड़ी से वसूली कांड: एसओजी प्रभारी समेत पूरी टीम सस्पेंड

Team The420
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कबाड़ी को अवैध रूप से हिरासत में रखकर वसूली करने के आरोप में एसओजी प्रभारी मोहित चौधरी समेत पूरी टीम को निलंबित कर दिया गया है। सीओ की जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद एसपी ने यह कार्रवाई की। निलंबित पुलिसकर्मियों में प्रभारी के अलावा छह अन्य सदस्य शामिल हैं। मामले ने पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है और जवाबदेही को लेकर सख्त संदेश गया है।

आरोप है कि 2 फरवरी को एसओजी टीम ने मोहल्ला लाडम सराय क्षेत्र से बिलारी (मुरादाबाद) निवासी एक कबाड़ी को ई-कचरे के साथ पकड़ा था। इसके बाद उसे थाने या किसी अधिकृत स्थान पर पेश करने के बजाय दो दिन तक हिरासत में रखा गया। पीड़ित का कहना है कि उसे छोड़ने के बदले ₹30 हजार वसूले गए। इतना ही नहीं, जब्त किए गए ई-कचरे को वापस करने के नाम पर उससे ₹40 हजार और की मांग की गई।

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शिकायत के बाद खुला मामला

कबाड़ी ने खुद को परेशान और ठगा हुआ महसूस करते हुए सीधे एसपी से शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने जांच सीओ संभल को सौंपी। सीओ ने मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों, पीड़ित और अन्य स्रोतों से जानकारी जुटाई और अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में वसूली के आरोप सही पाए गए।

रिपोर्ट मिलते ही एसपी ने बिना देरी के एसओजी प्रभारी और पूरी टीम को निलंबित कर दिया। विभागीय आदेश में स्पष्ट कहा गया कि प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मियों का आचरण नियमों के विरुद्ध पाया गया है और जांच पूरी होने तक उन्हें लाइन हाजिर किया गया है।

हिरासत की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल

मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद उसे निर्धारित समय के भीतर संबंधित थाने में दर्ज करना और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। यहां कथित तौर पर दो दिन तक हिरासत में रखने और वसूली के आरोप ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।

विस्तृत जांच एएसपी को

मामले की विस्तृत जांच अब एएसपी उत्तरी को सौंपी गई है। एएसपी यह जांच करेंगे कि वसूली की रकम किसने ली, टीम के किन-किन सदस्यों की भूमिका थी और क्या इस तरह की घटनाएं पहले भी हुई हैं। जांच के आधार पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।

विभागीय छवि पर असर

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और आम जनता का भरोसा कमजोर करती हैं। इसलिए मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई, निलंबन के बाद बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव है।

संदेश: जवाबदेही से समझौता नहीं

इस कार्रवाई को पुलिस महकमे में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध वसूली, हिरासत में अनियमितता या पद का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं में त्वरित जांच और सार्वजनिक कार्रवाई से पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है और आम लोगों का विश्वास बहाल होता है।

फिलहाल निलंबित पुलिसकर्मी लाइन हाजिर हैं और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मामले के खुलासे के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।

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