पुणे | भारतीय रेल में सब-इंजीनियर पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ऐंठने वाले एक संगठित भर्ती घोटाले का पुणे में पर्दाफाश हुआ है। आर्मी इंटेलिजेंस (सदर्न कमांड) और पुणे पुलिस की संयुक्त जांच के बाद इस मामले में एक मुख्य आरोपी को गुजरात के अहमदाबाद से गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अपनी कथित सरकारी पहुंच और संस्थागत पहचान का दुरुपयोग कर कई परिवारों को भरोसे में लिया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान स्वप्निल मुरलीधर गायकवाड़ (33) के रूप में हुई है, जो रक्षा विभाग में सिविल स्टाफ के तौर पर कार्यरत है और वर्तमान में अहमदाबाद में पोस्टेड था। पुलिस के अनुसार, उसकी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन के सुराग मिलने के बाद उसे हिरासत में लिया गया। मामले में दूसरा आरोपी सागर दिगंबर पाटील (35), निवासी जलगांव जिला, फरार है और उसकी तलाश जारी है।
रेलवे नौकरी का झांसा बना ठगी का जरिया
येरवडा पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने ऐसे परिवारों को निशाना बनाया जिनके सदस्य लंबे समय से रोजगार की तलाश में थे। शिकायतकर्ता दिनेश शंकर राठोड (37), निवासी रामनगर, येरवडा, ने पुलिस को बताया कि गायकवाड़ और पाटील ने उसके रिश्तेदारों से संपर्क कर खुद को रेलवे में प्रभाव रखने वाला बताया और सब-इंजीनियर पद पर पक्की नौकरी दिलाने का दावा किया।
जांच में सामने आया है कि गायकवाड़ ने खुद को रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ा बताकर विश्वसनीयता बनाई, जबकि पाटील को रेलवे में अंदरूनी पकड़ वाला व्यक्ति बताकर पेश किया गया। इसी आधार पर आरोपियों ने भर्ती प्रक्रिया, फाइल आगे बढ़ाने, मेडिकल क्लियरेंस और “अंतिम मंजूरी” के नाम पर पैसे मांगे।
कई महीनों में ₹19.15 लाख की वसूली
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपियों ने कई महीनों के दौरान शिकायतकर्ता और उसके रिश्तेदारों से कुल ₹19.15 लाख की रकम वसूली। यह राशि नकद, बैंक ट्रांसफर और UPI भुगतान के जरिए ली गई, जिससे जांच एजेंसियों को आंशिक मनी ट्रेल मिलने में मदद मिली।
जब तय समय पर नौकरी नहीं लगी और बार-बार की गई पूछताछ के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं मिला, तो आरोपियों ने कॉल और मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया। इसके बाद पीड़ितों को ठगी का शक हुआ और उन्होंने पुलिस का रुख किया।
आगे की जांच में यह भी सामने आया कि कम से कम तीन अन्य लोग इसी तरीके से ठगे जा चुके हैं।
आर्मी इंटेलिजेंस की सूचना से तेज हुई जांच
सूत्रों के अनुसार, यह मामला तब गंभीर रूप से सामने आया जब आर्मी इंटेलिजेंस ने अपने एक सिविल कर्मचारी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित किया। यह सूचना पुणे पुलिस के साथ साझा की गई, जिसके बाद एक संयुक्त जांच शुरू की गई।
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अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी सैन्य या सरकारी सिस्टम से छेड़छाड़ नहीं हुई, लेकिन सरकारी पहचान का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को ठगने का पहलू बेहद गंभीर है।
मनी ट्रेल और कॉल रिकॉर्ड की जांच जारी
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, UPI ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल कम्युनिकेशन की गहन जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी का दायरा कितना बड़ा है और क्या इसमें कोई और लोग शामिल हैं।
जांच अधिकारियों को आशंका है कि जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, और पीड़ित सामने आ सकते हैं। ठगी गई रकम की रिकवरी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
नौकरी के नाम पर ठगी पर बढ़ती चिंता
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि सरकारी नौकरियों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच फर्जी भर्ती रैकेट किस तरह बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि ठग अक्सर रेलवे, रक्षा विभाग और सार्वजनिक उपक्रमों जैसे भरोसेमंद संस्थानों का नाम इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करते हैं।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी नौकरी के प्रस्ताव को केवल आधिकारिक वेबसाइट और नोटिफिकेशन के जरिए ही सत्यापित करें और नौकरी के बदले पैसे मांगने वालों से सतर्क रहें।
और गिरफ्तारियां संभव
एक आरोपी की गिरफ्तारी और दूसरे की तलाश के बीच पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच के दायरे के बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए सख़्त संदेश है, जो सरकारी पहचान या संपर्क का नाम लेकर रोजगार के नाम पर ठगी करने की कोशिश करते हैं।
मामले की जांच जारी है।
