अनाज सप्लाई का जाल: प्रयागराज में नागपुर भाइयों ने ₹2.26Cr उड़ाए—GST खत्म फर्म से ठगी।

चावल-गेहूं सप्लाई का फर्जी सौदा, ₹2.26 करोड़ की ठगी; नागपुर के तीन भाई नामजद

Team The420
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चावल और गेहूं की सप्लाई का झांसा देकर ₹2.26 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। नागपुर के तीन सगे भाइयों पर आरोप है कि उन्होंने एक फर्म को अनाज सप्लाई का भरोसा दिलाकर रकम अलग-अलग बैंक खातों में मंगवाई, फिर माल भेजने के बजाय पैसे से अपना बैंक कर्ज चुकाया और शेष राशि आपस में बांट ली। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने तीनों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

शिकायत के अनुसार, इकावो हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड एवं मेटल अलायंस, बहादुरगंज के कर्मचारी रितेश श्रीवास्तव से मार्च 2025 में नागपुर निवासी दुर्गेश श्रीचंद्र गुप्ता, राजेश श्रीचंद्र गुप्ता और महेश श्रीचंद्र गुप्ता ने संपर्क किया। उन्होंने ‘सुरभि धान्य भंडार’ नाम की अपनी फर्म से चावल और गेहूं की सप्लाई का प्रस्ताव देकर ऑर्डर लिया।

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आरोप है कि आरोपियों ने फर्म के खाते की केवाईसी अपडेट न होने का बहाना बनाकर भुगतान अपने व्यक्तिगत और अन्य खातों में मंगवाया। कुल ₹2.26 करोड़ की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी अनाज की सप्लाई नहीं की गई।

जब शिकायतकर्ता ने माल की आपूर्ति को लेकर दबाव बनाया तो आरोपियों ने कथित तौर पर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी, बाद में फोन उठाना भी बंद कर दिया। फर्म की जांच करने पर पता चला कि ‘मेसर्स सुरभि धान्य भंडार’ का जीएसटी पंजीकरण पहले ही समाप्त किया जा चुका था।

शिकायत में यह भी आरोप है कि आरोपियों ने प्राप्त रकम से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का कर्ज चुकाया और बची हुई राशि आपस में बांट ली।

कोतवाली थाना प्रभारी ने बताया कि तीनों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और बैंक खातों के लेनदेन, जीएसटी रिकॉर्ड तथा कॉल डिटेल की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इसी तरीके से अन्य कारोबारियों को भी निशाना बनाया गया है।

मामले में आर्थिक अपराध के पहलुओं को देखते हुए धन के प्रवाह, फर्म के वास्तविक अस्तित्व और कथित सप्लाई चेन की जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित बैंकों से विवरण मांगा जाएगा और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जाएगी।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह धोखाधड़ी सुनियोजित प्रतीत होती है, जिसमें फर्जी व्यावसायिक भरोसा बनाकर बड़ी रकम हासिल की गई। आगे की जांच में और पीड़ितों के सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

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