गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और भारतीय तटरक्षक बल ने पोरबंदर तट के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) के निकट एक उच्च जोखिम वाले ऑपरेशन में 203 किलो संदिग्ध मादक रसायन बरामद कर दो ईरानी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। 16 फरवरी की सुबह हुए इस अभियान को ईरान से भारत तक फैले अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
खुफिया इनपुट के आधार पर तटरक्षक बल के एक मल्टी-मिशन पोत को नियमित गश्त से हटाकर इंटरसेप्शन मोड में लगाया गया। रडार पर एक संदिग्ध विदेशी नाव की गतिविधि दिखाई दी जो लगातार दिशा बदलकर निगरानी से बचने की कोशिश कर रही थी। सुरक्षा एजेंसियों के करीब पहुंचते ही नाव ने तेज रफ्तार से IMBL की ओर भागने का प्रयास किया, जो तस्करों की सामान्य रणनीति मानी जाती है ताकि वे भारतीय अधिकार क्षेत्र से बाहर निकल सकें।
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गहरे समुद्र में तेज पीछा करने के बाद सुबह करीब 8 बजे नाव को घेरकर रोक लिया गया। तलाशी में दो बलोची भाषा बोलने वाले ईरानी नागरिक—अब्दुल मजीद और अब्दुल सत्तार—को हिरासत में लिया गया। नाव से 203 सीलबंद पैकेट बरामद हुए, जिनमें मौजूद पदार्थ उच्च गुणवत्ता वाले मादक पदार्थ या बड़े पैमाने पर ड्रग निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर के रूप में जांच के दायरे में हैं।
ईरान से पंजाब तक संगठित नेटवर्क की आशंका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि खेप ईरान के कोनार्क बंदरगाह से कथित तस्कर हाजी फिदा द्वारा लोड की गई थी। इसे समुद्र के बीच भारतीय नाव को सौंपकर आगे पंजाब पहुंचाया जाना था, जिससे एक सुव्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का संकेत मिलता है।
अधिकारियों के अनुसार पकड़ी गई नाव में अतिरिक्त डीजल, भोजन और कई दिनों तक समुद्र में रहने का सामान मौजूद था, जो सुनियोजित घुसपैठ की ओर इशारा करता है। खुफिया एजेंसियों ने हाल के महीनों में ऐसे पैटर्न की पहचान की है, जिसमें बड़े “मदर वेसल” समुद्र में दूर रुकते हैं और छोटी तेज नावें अंतिम चरण में भारतीय जल सीमा में प्रवेश करती हैं।
स्पीड बोट से डिलीवरी का दुर्लभ और जोखिम भरा तरीका
ATS अधिकारियों ने बताया कि स्पीड बोट के जरिए रसायन पहुंचाने की यह दुर्लभ और उच्च जोखिम वाली रणनीति थी, जिसका उद्देश्य तटीय गश्ती तंत्र को चकमा देना था। खुफिया सूचना मिलने के बाद पोरबंदर तट पर विशेष इकाइयों को तैनात कर संभावित मार्ग पर इंटरसेप्शन ट्रैप लगाया गया था।
यह ऑपरेशन 15 फरवरी की देर रात मिले अलर्ट के बाद शुरू हुआ था, जिसमें करीब 200 किलो रसायन भारतीय जल सीमा में प्रवेश कर सौंपे जाने की जानकारी दी गई थी। केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के समन्वय से खेप को ट्रांसफर से पहले ही पकड़ लिया गया।
फोरेंसिक जांच से सामने आएगा पूरा नेटवर्क
आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि संपर्क श्रृंखला, डिलीवरी निर्देश और भारत में संभावित रिसीवर—विशेषकर पंजाब कनेक्शन—का पता लगाया जा सके। जब्त रसायनों की प्रकृति तय करने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण भी किए जा रहे हैं।
जब्त नाव, बरामद पैकेट और दोनों आरोपियों को पोरबंदर स्थित तटरक्षक स्टेशन लाकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
समुद्री तस्करी मार्गों पर बढ़ती चुनौती
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह कार्रवाई ईरान–भारत समुद्री ड्रग कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण कड़ी तोड़ने में सफल रही है। मामला यह भी दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय तस्कर पारंपरिक जमीनी मार्गों की बजाय समुद्री रास्तों का आक्रामक उपयोग कर रहे हैं।
जांच एजेंसियों ने संकेत दिया है कि घरेलू सहयोगियों और वित्तीय नेटवर्क की पहचान के साथ आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह ऑपरेशन न केवल बड़ी मात्रा में ड्रग्स के प्रवेश को रोकने में सफल रहा, बल्कि संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निगरानी मजबूत करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
