खालिस्तानी समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश में आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को अमेरिकी अदालत से 24 वर्ष तक की जेल हो सकती है। 54 वर्षीय गुप्ता ने मैनहट्टन की संघीय अदालत में सुपारी देकर हत्या की साजिश रचने, हत्या के प्रयास और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गुप्ता ने अमेरिका में एक व्यक्ति की हत्या कराने के लिए सहमति जताई थी और इस काम के लिए न्यूयॉर्क में एक व्यक्ति को 15,000 डॉलर का भुगतान भी किया। अदालत में सुनवाई के दौरान गुप्ता ने माना कि उसने एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई थी और इसके लिए धन का लेन-देन किया गया।
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अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने कहा कि जिला न्यायाधीश विक्टर मरेरो 29 मई 2026 को औपचारिक रूप से सजा सुनाएंगे। दोष स्वीकार करने के बाद अब अदालत सजा की अवधि तय करेगी, जो अधिकतम 24 वर्ष तक हो सकती है।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह कथित साजिश अमेरिकी कानून प्रवर्तन की सक्रिय कार्रवाई के कारण नाकाम कर दी गई। अधिकारियों ने कहा कि मामले में गुप्त निगरानी, अंडरकवर ऑपरेशन और वित्तीय लेन-देन की ट्रैकिंग के जरिए साजिश का पता लगाया गया।
अमेरिकी एजेंसियों ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध बताया है। जांच में यह भी आरोप लगाया गया था कि गुप्ता ने एक भारतीय अधिकारी के साथ मिलकर योजना बनाई थी, हालांकि इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर न्यूयॉर्क की ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीईए) ने गुप्ता की तस्वीरें जारी करते हुए कहा कि क्षेत्रीय अधिकारियों ने दोष स्वीकार करने के बाद बयान जारी किया है। एजेंसी ने इस मामले में शामिल जांच अधिकारियों के काम की सराहना की है।
एफबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह साजिश समय रहते विफल कर दी गई और इसका श्रेय अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित कार्रवाई को जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अमेरिकी नागरिक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिकी-कनाडाई नागरिक है और भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा घोषित आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध है। इस मामले ने भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था, क्योंकि इसमें सीमा पार गतिविधियों और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका को लेकर कई सवाल उठे थे।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार दोष स्वीकार करने से मुकदमे की प्रक्रिया संक्षिप्त हो जाती है, लेकिन सजा का निर्धारण अपराध की प्रकृति, वित्तीय लेन-देन, साजिश की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव जैसे कारकों के आधार पर किया जाता है।
अदालत द्वारा मई में सुनाए जाने वाले फैसले पर दोनों देशों की एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी, क्योंकि यह मामला सीमा पार साजिश, आतंकवाद और कानून प्रवर्तन सहयोग से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी प्रभावित करता है।
