नई दिल्ली | प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसने PACL (पर्ल्स ग्रुप) घोटाले से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में ₹1,986 करोड़ से अधिक मूल्य की नई संपत्तियों को अटैच किया है। यह मामला कई वर्षों से जांच के दायरे में है और इसे भारत के सबसे बड़े निवेश घोटालों में गिना जाता है।
ईडी द्वारा यह ताजा कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। इसके तहत पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर में स्थित 37 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹1,986.48 करोड़ आंका गया है। इस कदम के साथ ही PACL मामले में अब तक ईडी द्वारा अटैच की गई चल-अचल संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़कर करीब ₹7,589 करोड़ हो गया है।
ईडी के अनुसार, ये संपत्तियां कथित तौर पर अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) से खरीदी गई थीं, जो PACL लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं द्वारा संचालित कथित पोंजी स्कीम से अर्जित की गई। एजेंसी ने कहा कि निवेशकों से जुटाए गए धन का एक हिस्सा इन अचल संपत्तियों के अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया।
PACL घोटाले की पृष्ठभूमि
PACL मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच से जुड़ा है, जिसने PACL लिमिटेड के कामकाज की पड़ताल शुरू की थी। कंपनी ने खुद को जमीन और कृषि विकास से जुड़ी सामूहिक निवेश योजना (कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम) के रूप में पेश किया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, PACL और इसके प्रमोटरों ने देशभर में लाखों निवेशकों से वर्षों तक धन जुटाया, उन्हें ऊंचे रिटर्न और जमीन देने का वादा किया गया, जो बाद में पूरा नहीं हुआ।
जांच में यह भी आरोप सामने आए कि कंपनी ने कृषि भूमि में निवेश का दावा किया, लेकिन अधिकांश मामलों में न तो निवेशकों को जमीन दी गई और न ही उनका पैसा लौटाया गया। अनुमान के मुताबिक, निवेशकों का करीब ₹48,000 करोड़ अब भी बकाया है। इसी वजह से इस घोटाले को देश की सबसे बड़ी धोखाधड़ी और पोंजी स्कीमों में शामिल किया जाता है।
CBI की प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने वर्ष 2016 में एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की थी। इसके बाद एजेंसी ने PMLA के तहत कई अभियोजन शिकायतें दाखिल कीं। जांच में यह भी सामने आया कि निवेशकों के धन को छिपाने के लिए शेल कंपनियों और जटिल वित्तीय लेन-देन का सहारा लिया गया।
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कानूनी प्रक्रिया और जांच की स्थिति
ईडी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों को कथित घोटाले से अर्जित धन से जुड़ा माना जा रहा है। इनमें प्रमुख भू-खंड और रियल एस्टेट संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न सहयोगी इकाइयों के जरिये खरीदा गया था। ईडी की यह कार्रवाई अस्थायी (प्रोविजनल) है, यानी विशेष PMLA अदालत में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इन संपत्तियों को फ्रीज रखा जाएगा।
इस मामले में ईडी अब तक तीन चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जांच के दौरान एजेंसी ने फॉरेंसिक ऑडिट, जटिल कॉरपोरेट ढांचे की पड़ताल और कई बैंक खातों व संस्थाओं के बीच धन के प्रवाह को ट्रेस किया है।
निवेशकों और प्रवर्तन व्यवस्था पर असर
PACL घोटाले से सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे और खुदरा निवेशक रहे हैं, जिनमें से कई ने जीवनभर की जमा-पूंजी इस योजना में लगा दी थी। हालांकि ईडी द्वारा संपत्तियों की कुर्की से तत्काल निवेशकों को पैसा लौटने की गारंटी नहीं मिलती, लेकिन इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्तियों को सुरक्षित रखना है ताकि भविष्य में कानूनी प्रक्रिया के तहत मुआवजे या वसूली की संभावना बनी रहे।
ईडी और CBI जैसी एजेंसियां हाल के वर्षों में बड़े वित्तीय अपराधों, खासकर पोंजी स्कीम और अवैध निवेश योजनाओं पर शिकंजा कसने के लिए PMLA का व्यापक इस्तेमाल कर रही हैं। संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी या संबंधित संस्थाएं अपराध की आय को ठिकाने न लगा सकें।
PACL मामला अब भी नियामकों, निवेशक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों की निगाह में है, क्योंकि यह देश में अवैध निवेश योजनाओं पर निगरानी और आम निवेशकों के हितों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।
