पहले सत्यापन, फिर फ्रीज़: ऑनलाइन ठगी मामलों में बैंक खातों पर कार्रवाई को लेकर MHA ने कसे नियम

Team The420
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नई दिल्ली | ऑनलाइन वित्तीय ठगी से निपटने के दौरान बैंक खातों के बड़े पैमाने पर फ्रीज़ किए जाने और इसके बावजूद पीड़ितों को बेहद सीमित धनवापसी मिलने पर चिंता जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए नए और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बैंक खाते को फ्रीज़ करने से पहले शिकायत की प्रामाणिकता का अनिवार्य सत्यापन किया जाना चाहिए।

यह निर्देश ऑनलाइन ठगी मामलों के निपटारे के लिए जारी संशोधित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के माध्यम से दर्ज शिकायतों पर लागू होंगी। मंत्रालय का उद्देश्य साइबर अपराध पर त्वरित कार्रवाई और निर्दोष खाताधारकों के वित्तीय अधिकारों के बीच संतुलन बनाना बताया गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 के बीच साइबर ठगों तक पहुंचने से पहले ₹7,647 करोड़ की राशि को रोका गया। इसके बावजूद इसी अवधि में पीड़ितों को केवल ₹167 करोड़ की ही वापसी हो सकी, जबकि कुल ऑनलाइन वित्तीय ठगी से हुआ नुकसान ₹52,969 करोड़ तक पहुंच गया। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि रकम को शुरुआती स्तर पर रोकने में सफलता मिली है, लेकिन वास्तविक रिकवरी की दर बेहद कम बनी हुई है।

संशोधित SOPs में यह स्पष्ट किया गया है कि केवल सत्यापित और वास्तविक शिकायतों को ही वित्तीय ठगी प्रतिक्रिया प्रणाली में आगे बढ़ाया जाए। मंत्रालय के अनुसार, कई मामलों में अपर्याप्त जांच या गलत पहचान के चलते ऐसे खातों को भी फ्रीज़ कर दिया गया, जिनका ठगी से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। इसका सीधा असर निर्दोष खाताधारकों की रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों पर पड़ा।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के संज्ञान में ऐसे अनेक मामले आए हैं जहां वेतन खाते, चालू खाते और बचत खाते लंबे समय तक फ्रीज़ रहे। इसके कारण वेतन निकासी, आवश्यक भुगतान और व्यापार संचालन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हुईं। कई मामलों में विवादित या गलत तरीके से चिह्नित लेन-देन के आधार पर पूरे खाते पर रोक लगा दी गई।

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नए ढांचे के तहत एजेंसियों को यह निर्देश दिया गया है कि फंड को ‘होल्ड’ पर रखने, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं निलंबित करने या जब्ती जैसी कार्रवाइयां अनुपातिक और संतुलित तरीके से की जाएं। हर स्तर पर जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि मनमानी या अत्यधिक कार्रवाई को रोका जा सके।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि धन कुछ ही मिनटों में कई खातों में ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि, बिना पर्याप्त जांच के खातों को फ्रीज़ करना न केवल जनविश्वास को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि अनावश्यक मानसिक और आर्थिक दबाव भी पैदा करता है। अधिकारी के शब्दों में, “उद्देश्य ठगी की रकम को तेजी से रोकना है, न कि वैध वित्तीय गतिविधियों को ठप करना।”

रीयल-टाइम प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के लिए बैंकों को NCRP के साथ अपने API सिस्टम को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे संदिग्ध लेन-देन को तुरंत ‘होल्ड’ पर रखने में मदद मिलेगी और पुलिस, बैंक, भुगतान सेवा प्रदाताओं व अन्य वित्तीय मध्यस्थों के बीच समन्वय मजबूत होगा।

मंत्रालय का मानना है कि तकनीकी एकीकरण और तेज सूचना-साझाकरण से ठगी की रकम को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकेगा। इससे उन देरी को कम किया जा सकेगा, जिनका फायदा उठाकर साइबर अपराधी धन को कई खातों में घुमा देते हैं और रिकवरी को जटिल बना देते हैं।

MHA ने स्पष्ट किया है कि संशोधित SOPs का उद्देश्य प्रवर्तन को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे अधिक सटीक, न्यायसंगत और जवाबदेह बनाना है। खातों को फ्रीज़ करने से पहले कड़ी जांच सुनिश्चित कर सरकार वास्तविक ठगी नेटवर्क पर फोकस करना चाहती है, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।

साथ ही, मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी साइबर ठगी की सूचना तुरंत NCRP पर दर्ज कराएं, क्योंकि शुरुआती रिपोर्टिंग से धन की रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम साइबर अपराध से निपटने के अधिक संतुलित और भरोसेमंद ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।

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