निवेश ठगी से सबसे बड़ा नुकसान; मामलों में तेज वृद्धि, पर रियल-टाइम हस्तक्षेप से रकम का बड़ा हिस्सा बचा

₹133 करोड़ साइबर ठगी का मनी ट्रेल उजागर; ‘ऑपरेशन साइबर सुरक्षा कवच’ में 20 गिरफ्तार, 300 से अधिक म्यूल खाते चिन्हित

Roopa
By Roopa
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संबलपुर/बरगढ़/राउरकेला: ओडिशा पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइबर सुरक्षा कवच’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन जिलों में फैले साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में अब तक ₹133 करोड़ से अधिक की संदिग्ध ट्रांजैक्शन का मनी ट्रेल सामने आया है, जबकि म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम घुमाने का संगठित तंत्र उजागर हुआ है।

पुलिस के अनुसार, केवल संबलपुर जिले में भारतीय साइबर क्राइम समन्वय केंद्र (I4C) के डेटा विश्लेषण के आधार पर 300 से अधिक संदिग्ध म्यूल खाते चिन्हित किए गए। इनमें से 140 खातों का सत्यापन हो चुका है, जिनमें करीब ₹110.30 करोड़ का लेनदेन पाया गया है। शेष खातों की जांच जारी है।

कार्रवाई के दौरान अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 32 अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। इन 52 खातों से जुड़े ट्रांजैक्शन ही लगभग ₹75.36 करोड़ के पाए गए हैं, जिससे नेटवर्क के व्यापक पैमाने का संकेत मिलता है।

बरगढ़ में भी एक बड़े म्यूल अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश हुआ, जिसमें एक ही मामले में करीब ₹10 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई। अभियान शुरू होने के बाद ₹5.03 करोड़ से अधिक के नौ अतिरिक्त साइबर फ्रॉड केस दर्ज किए गए हैं।

सबसे बड़ी गिरफ्तारी में पुलिस ने मनोज कुमार कुशल (35) को पकड़ा, जिस पर कई बैंक खाते खोलकर ठगी की रकम को रूट करने का आरोप है। उसके पास से 57 पासबुक, 19 चेकबुक, 81 एटीएम कार्ड और 26 सिम कार्ड बरामद किए गए। यह बरामदगी संगठित बैंकिंग किट आधारित साइबर नेटवर्क की ओर इशारा करती है।

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जिले में अब तक विभिन्न बैंकों के 1,062 संदिग्ध खातों का सत्यापन किया गया है और 10 संज्ञेय मामले दर्ज हुए हैं। जांच के दौरान ऐसे पीओएस एजेंटों और अन्य लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किए गए हैं, जिन पर डिजिटल अरेस्ट और प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) ठगी में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड जारी करने का आरोप है।

राउरकेला में भी सघन अभियान के तहत अलग-अलग थानों में 10 साइबर अपराध मामले दर्ज किए गए, जहां अब तक ₹8.14 करोड़ से अधिक की ठगी का पता चला है।

पुलिस का कहना है कि अभियान का उद्देश्य म्यूल अकाउंट नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है और यह कार्रवाई 27 फरवरी तक जारी रहेगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930, cybercrime.gov.in पोर्टल या नजदीकी थाने/साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि रकम को ट्रेस कर समय रहते रोका जा सके।

यह कार्रवाई दर्शाती है कि साइबर अपराध अब संगठित वित्तीय नेटवर्क का रूप ले चुका है, जहां बैंक खाते, सिम कार्ड और फर्जी पहचान का उपयोग कर बहु-स्तरीय लेनदेन के जरिए रकम को छिपाया जाता है। पुलिस ने संकेत दिया है कि आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं तथा बैंकिंग और टेलीकॉम चैनलों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।

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