11 अप्रैल से लागू होगा नया सिस्टम; प्रति सेकंड 10 करोड़ ऑर्डर प्रोसेसिंग क्षमता, साइबर सुरक्षा पर कड़ा अलर्ट

NSE का टेक धमाका: नैनोसेकंड में होंगे ट्रेड, 1000 गुना तेज होगी बाजार की रफ्तार

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By Roopa
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मुंबई: भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में एक बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 11 अप्रैल से अपना ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड कर नैनोसेकंड स्तर का रिस्पॉन्स टाइम हासिल करेगा, जिससे ऑर्डर मैचिंग और ट्रेड एक्सीक्यूशन की गति मौजूदा व्यवस्था की तुलना में करीब 1000 गुना तेज हो जाएगी। यह बदलाव न सिर्फ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग के परिदृश्य को बदलेगा, बल्कि बढ़ते ट्रेडिंग वॉल्यूम को संभालने में भी एक्सचेंज को नई क्षमता देगा।

अभी NSE का सिस्टम लगभग 100 माइक्रोसेकंड के रिस्पॉन्स टाइम पर काम करता है और प्रति सेकंड 50 से 60 लाख ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने में सक्षम है। नए अपग्रेड के बाद यह क्षमता बढ़कर लगभग 10 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रति सेकंड हो जाएगी। एक्सचेंज के अनुसार, इतनी तेज प्रोसेसिंग से लेटेंसी लगभग समाप्त हो जाएगी और बाजार वास्तविक समय में प्रतिक्रिया देने लगेगा, जिससे प्राइस डिस्कवरी की प्रक्रिया अधिक कुशल होगी।

तकनीकी रूप से नैनोसेकंड सेकंड का अरबवां हिस्सा होता है, जबकि माइक्रोसेकंड सेकंड का दस लाखवां हिस्सा होता है। इस स्तर की गति हासिल करना वैश्विक स्तर के प्रमुख एक्सचेंजों के बराबर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संस्थागत निवेशकों और एल्गोरिदमिक ट्रेडर्स को बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि ऑर्डर प्लेसमेंट और एक्जीक्यूशन के बीच का समय बेहद कम हो जाएगा।

इसी के साथ NSE अपने कोलोकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी कर रहा है। फिलहाल एक्सचेंज के डेटा सेंटर में लगभग 2000 रैक्स उपलब्ध हैं, जिन्हें बढ़ाकर 4500 तक ले जाने की योजना है। कोलोकेशन सुविधा के जरिए ट्रेडिंग मेंबर्स अपने सर्वर एक्सचेंज के पास रख सकते हैं, जिससे मार्केट डेटा प्राप्त करने और ऑर्डर भेजने में होने वाली देरी न्यूनतम रहती है। हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग फर्में इसी मॉडल का उपयोग करती हैं और नए अपग्रेड के बाद इस सेगमेंट में गतिविधि और बढ़ने की संभावना है।

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एक्सचेंज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस को भी बढ़ावा दे रहा है, ताकि टेक्नोलॉजी वेंडर्स कम लागत में अधिक सक्षम प्लेटफॉर्म विकसित कर सकें। इसके अलावा बिजली फ्यूचर्स, गोल्ड फ्यूचर्स और कॉन्ट्रैक्ट्स फॉर डिफरेंस (CFD) जैसे नए प्रोडक्ट लॉन्च करने की तैयारी चल रही है। 10 ग्राम गोल्ड फ्यूचर्स को नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है और इसके जल्द शुरू होने की संभावना है, जिससे कम पूंजी वाले निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है।

हालांकि इतनी हाई-स्पीड ट्रेडिंग के साथ जोखिम भी बढ़ते हैं। एक्सचेंज ने ब्रोकर्स और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स को स्पष्ट रूप से चेताया है कि साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। बड़े पैमाने पर ऑटोमेटेड ट्रेडिंग सिस्टम में किसी भी तकनीकी गड़बड़ी या साइबर हमले का असर पूरे बाजार पर पड़ सकता है। इसीलिए मजबूत फायरवॉल, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और फेल-सेफ मैकेनिज्म अनिवार्य बताए गए हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपग्रेड भारत को वैश्विक ट्रेडिंग टेक्नोलॉजी की दौड़ में आगे ले जाएगा और विदेशी निवेशकों के लिए बाजार को अधिक आकर्षक बनाएगा। हालांकि इसके साथ नियामकीय निगरानी, एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग पर नियंत्रण और मार्केट फेयरनेस को बनाए रखने के लिए जोखिम प्रबंधन ढांचे को भी मजबूत करना होगा।

तेजी से बढ़ते ट्रेडिंग वॉल्यूम, नए निवेशकों की एंट्री और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच NSE का यह कदम भारतीय बाजार के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर होगी कि यह हाई-स्पीड इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार की स्थिरता और पारदर्शिता को बनाए रखते हुए कितनी प्रभावी भूमिका निभाता है।

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