30 फीट गहरा पानी भरा गड्ढा और टूटी प्रशासनिक निगरानी: इंजीनियर युवराज दुर्घटना, दो बिल्डर गिरफ्तार

Team The420
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ग्रेटर नोएडा | सेक्टर-150 में जलभराव वाले गहरे गड्ढे में कार गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (27) की मौत के मामले में नोएडा पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। ग्रेटर नोएडा पुलिस ने इस प्रकरण में दो और बिल्डरों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी उन पांच बिल्डरों के खिलाफ दर्ज मामले के तहत की गई है, जिन पर लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का आरोप है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच हर स्तर पर आगे बढ़ाई जा रही है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए बिल्डरों की पहचान Lotus Greens Construction Pvt Ltd से जुड़े रवि बंसल और सचिन कर्णवाल के रूप में हुई है। इससे पहले MZ Wiztown Planners Pvt Ltd से जुड़े बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस का कहना है कि लापरवाह बिल्डरों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कैसे हुआ हादसा

यह हादसा शुक्रवार देर रात नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र में सेक्टर-150 के पास एटीएस ली-ग्रैंडिओस मोड़ पर हुआ। गुरुग्राम से ड्यूटी कर घर लौट रहे युवराज मेहता की कार घने कोहरे और तेज रफ्तार के बीच अनियंत्रित होकर निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में जा गिरी। बताया गया कि बेसमेंट करीब 30 फीट गहरा था और उसमें लंबे समय से पानी भरा हुआ था।

हादसे के बाद युवराज ने मोबाइल फोन से अपने पिता को कॉल कर बताया कि वह पानी में डूब रहा है। सूचना मिलते ही पिता और पुलिस मौके पर पहुंचे, लेकिन अंधेरा, घना कोहरा और पानी की अधिक गहराई के कारण बचाव कार्य में कठिनाइयां आईं। दमकल विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने करीब साढ़े चार घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। युवराज को पानी से निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

लापरवाही के गंभीर आरोप

मृतक के परिजनों ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि घटनास्थल के पास न तो बैरिकेडिंग थी और न ही रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत लगाए गए थे। सार्वजनिक सड़क के पास खुले और पानी से भरे गड्ढे को छोड़ देना गंभीर लापरवाही है। पुलिस जांच में भी सामने आया है कि लंबे समय से यह गड्ढा बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के मौजूद था, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी।

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पुलिस ने इस मामले में पर्यावरण और प्रदूषण कानूनों के उल्लंघन को लेकर भी अलग से प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि लंबे समय तक जमा पानी से प्रदूषण फैल रहा था और आसपास के इलाकों में दुर्गंध की शिकायतें मिल रही थीं।

एनजीटी ने भी लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए National Green Tribunal (NGT) ने भी संज्ञान लिया है। एनजीटी ने नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग और गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करें।

जांच का दायरा बढ़ा

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। SIT ने Noida Authority के कई विभागों से लिखित जवाब मांगे हैं। माना जा रहा है कि जांच में यह देखा जाएगा कि निर्माण की अनुमति, पर्यावरणीय स्वीकृति और सुरक्षा मानकों के पालन में कहां-कहां चूक हुई।

आगे की कार्रवाई पर नजर

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी विकास और निर्माण निगरानी में खामियों को उजागर करता है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। प्रशासन का दावा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल, युवराज मेहता की मौत ने एक बार फिर निर्माण स्थलों की सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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