₹12 करोड़ की साइबर ठगी में आरोपी को झटका, अदालत ने जमानत ठुकराई

Team The420
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ग्रेटर नोएडा: गौतमबुद्ध नगर की सत्र अदालत ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर एक शहर के आर्किटेक्ट से करीब ₹12 करोड़ की ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपराध की गंभीरता, आरोपी की सक्रिय भूमिका और केस डायरी में मौजूद सबूतों को आधार बनाते हुए राहत देने से इनकार किया। अदालत ने टिप्पणी की कि यह मामला जिले के बड़े साइबर अपराधों में शामिल है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़ित को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर एक कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में निवेश के लिए उकसाया गया। जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि करीब 17 दिनों के भीतर अलग-अलग बैंक खातों में ₹11.99 करोड़ ट्रांसफर कराए गए, जिनका संचालन या समन्वय आरोपी से जुड़ा बताया गया है।

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, जब पीड़ित ने कथित “मुनाफा” निकालने की कोशिश की तो शुरुआत में थोड़ी रकम वापस की गई—जिसे जांचकर्ता भरोसा बनाने की रणनीति मानते हैं। इसके बाद पीड़ित से कंपनी के आईपीओ में ₹17 करोड़ अतिरिक्त निवेश का दबाव बनाया गया। इसी चरण पर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के बाद सेक्टर-36, नोएडा स्थित साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने लेन-देन की डिजिटल ट्रेल खंगालते हुए संबंधित खातों को फ्रीज किया और आरोपी को गिरफ्तार किया। जमानत सुनवाई के दौरान अभियोजन ने दलील दी कि डिजिटल सबूत आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट करते हैं और हिरासत में पूछताछ से धन के प्रवाह से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।

अदालत ने गंभीरता और व्यापक असर पर जोर दिया

जमानत खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि इस स्तर की साइबर ठगी न केवल व्यक्तियों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि डिजिटल वित्तीय प्रणालियों में सार्वजनिक भरोसे को भी चोट पहुंचाती है। अदालत ने यह भी माना कि इस चरण पर आरोपी को रिहा करना जांच को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब धन का लेन-देन कई खातों और संभावित रूप से विभिन्न क्षेत्रों में फैला हो।

जांच एजेंसियों ने अदालत को यह भी बताया कि आरोपी से जुड़े बैंक खाते का जिक्र राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्ज 23 अन्य साइबर शिकायतों में सामने आया है, जो किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। पुलिस के अनुसार, यह म्यूल अकाउंट्स के जरिए ठगी की रकम घुमाने का मामला हो सकता है।

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ठगी का तरीका जांच के दायरे में

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह मामला ऑनलाइन निवेश घोटालों के उस पैटर्न से मेल खाता है, जिसमें पहले ऊंचे रिटर्न का वादा किया जाता है, फर्जी डैशबोर्ड या स्टेटमेंट दिखाए जाते हैं और शुरुआती भरोसा बनाने के लिए छोटी रकम लौटाई जाती है। भरोसा बनते ही बड़ी राशि मांगी जाती है, जिसके बाद या तो एक्सेस रोक दिया जाता है या नए बहाने बनाकर और पैसे की मांग की जाती है।

पुलिस अब अन्य लाभार्थियों की पहचान, रकम के अंतिम उपयोग और यह पता लगाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि आरोपी अकेला था या किसी बड़े गिरोह का हिस्सा। बैंक और सेवा प्रदाताओं से लेन-देन का विस्तृत डेटा मांगा गया है और आगे और गिरफ्तारियां भी संभव बताई जा रही हैं।

सतर्कता की अपील

मामले के बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने नागरिकों से ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और बिना मांगे आए निवेश प्रस्तावों से सावधान रहने की अपील दोहराई है। अधिकारियों ने कहा कि वैध निवेश योजनाएं न तो जल्दबाजी में कई खातों में पैसे ट्रांसफर कराने को कहती हैं और न ही गारंटीड रिटर्न का वादा करती हैं।

आगे की राह

जमानत खारिज होने के बाद आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेगा, जबकि जांच एजेंसियां धन के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं। अभियोजन पक्ष द्वारा आगे पूरक सामग्री दाखिल किए जाने की संभावना है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह आदेश बड़े साइबर अपराधों पर अदालतों के सख्त रुख को दर्शाता है—खासकर तब, जब डिजिटल सबूत बार-बार की संलिप्तता की ओर इशारा करते हों।

तेजी से बढ़ते साइबर-आधारित वित्तीय अपराधों के बीच यह मामला आकर्षक दिखने वाली ऑनलाइन निवेश योजनाओं के जोखिम और ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए सख्त कानूनी परिणामों की एक स्पष्ट चेतावनी है।

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