मुंबई: Enforcement Directorate (ईडी) ने मुंबई की विशेष अदालत में अर्जी दाखिल कर भगोड़े हीरा कारोबारी Nirav Modi के भाई नेहल मोदी को ₹6,498 करोड़ के Punjab National Bank (पीएनबी) लोन फ्रॉड मामले में भगोड़ा आर्थिक अपराधी (FEO) घोषित करने की मांग की है।
3 फरवरी को दायर अर्जी में एजेंसी ने Fugitive Economic Offenders Act, 2018 के प्रावधानों का हवाला देते हुए नेहल मोदी को घोटाले का “प्राइम को-कॉन्सपिरेटर” बताया है। ईडी का आरोप है कि उसने अपराध की आय को विदेशों में लेयरिंग और ट्रांसफर करने, डिजिटल सबूत नष्ट करने तथा गवाहों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाई।
46 वर्षीय नेहल मोदी जुलाई 2025 से अमेरिका की जेल में बंद है। उसकी गिरफ्तारी भारत की प्रत्यर्पण मांग के आधार पर हुई थी। ईडी के अनुसार, उसने अपने चाचा Mehul Choksi की मदद से 2018 में घोटाला सामने आने के बाद कथित रूप से अवैध धन को विभिन्न विदेशी कंपनियों के जरिए इधर-उधर किया।
अदालत में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, अमेरिका स्थित Samuels Jewellers Inc और Diamlink Inc को दुबई की शेल कंपनियों के जरिए करीब 19 मिलियन डॉलर की कथित अपराध राशि प्राप्त हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि इन कंपनियों के संचालन और फंड के ट्रांसफर की निगरानी नेहल मोदी करता था, ताकि पैसों के स्रोत को छिपाया जा सके।
ईडी ने यह भी कहा कि नेहल मोदी Twin Fields Investments Limited और Bailey Bank and Biddle जैसी विदेशी इकाइयों के कामकाज से जुड़ा था, जिन्हें निरव मोदी की डमी कंपनियों से कम से कम 50 मिलियन डॉलर मिले। ‘The Ithaca Trust’ नामक एक ट्रस्ट के प्रोटेक्टर और निवेश सलाहकार के रूप में उसने कथित तौर पर लगभग 30 मिलियन डॉलर की राशि के इस्तेमाल की निगरानी की, जिससे अमेरिका में अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि घोटाला उजागर होने के बाद नेहल मोदी ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए बड़े पैमाने पर संपत्तियां विदेशों से हटाईं। ईडी के अनुसार, उसने दुबई से लगभग 6 मिलियन डॉलर के हीरे, हांगकांग से 150 बॉक्स मोती, 3.5 मिलियन दिरहम नकद और करीब 50 किलो सोना हटाया।
डिजिटल सबूत नष्ट करने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अर्जी में कहा गया है कि दुबई में समूह के लेन-देन को संचालित करने वाले एक सुरक्षित सर्वर और कई मोबाइल फोन उसके निर्देश पर नष्ट किए गए, ताकि जांच में बाधा डाली जा सके।
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गवाहों को प्रभावित करने के आरोप भी सामने आए हैं। ईडी ने अदालत को बताया कि नेहल मोदी ने कुछ डमी निदेशकों को कथित तौर पर काहिरा स्थानांतरित किया, उनके पासपोर्ट जब्त किए और उनसे हलफनामे पर हस्ताक्षर कराए, जिनमें निरव मोदी को शेल कंपनियों से दूर दिखाया गया। एक मामले में उस पर यूरोपीय न्यायिक अधिकारियों के समक्ष झूठी गवाही दिलाने के लिए 20 लाख रुपये की पेशकश करने का भी आरोप है।
2018 में लागू भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम उन आरोपियों की संपत्तियां जब्त करने की अनुमति देता है, जो 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक के आर्थिक अपराध के मामलों में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहते हैं। इस कानून के तहत संपत्ति की कुर्की सजा पर निर्भर नहीं होती।
ईडी ने चार्जशीट, अभियोजन शिकायतें, गैर-जमानती वारंट और रेड नोटिस का हवाला देते हुए अदालत से कहा है कि नेहल मोदी 2018 से भारत लौटकर जांच या मुकदमे में शामिल नहीं हुआ है।
इस बीच, निरव मोदी के खिलाफ यूनाइटेड किंगडम में प्रत्यर्पण कार्यवाही जारी है, जबकि मेहुल चोकसी बेल्जियम में कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
पीएनबी घोटाला, जिसमें फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग जारी कर विदेशी क्रेडिट हासिल किया गया, देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक माना जाता है। इस मामले के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में निगरानी और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था को लेकर व्यापक सुधार किए गए।
मुंबई की विशेष अदालत आने वाले हफ्तों में ईडी की अर्जी पर सुनवाई कर सकती है। यदि नेहल मोदी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जाता है, तो उसकी घरेलू संपत्तियां आपराधिक मुकदमे के अंतिम फैसले से पहले ही जब्त की जा सकेंगी, जिससे वसूली की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है।
