हाई-वैल्यू साइबर ठगी के एक गंभीर मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। ठगों द्वारा ₹78.50 लाख की धोखाधड़ी का शिकार बने एक वरिष्ठ नागरिक को आंशिक राहत देते हुए जांच एजेंसियों ने ₹34 लाख की राशि बरामद कर कानूनी प्रक्रिया के तहत पीड़ित को वापस कर दी है। मामले में राजस्थान के जयपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर नागपुर लाया गया है।
यह मामला नागपुर निवासी एक बुजुर्ग से जुड़ा है, जो एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि 11 नवंबर को उन्हें एक फोन कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस उपनिरीक्षक बताया। आरोपी ने दावा किया कि पीड़ित का बैंक खाता एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ा है, जिसे एक हाई-प्रोफाइल एयरलाइन फ्रॉड से जोड़कर बताया गया।
कॉल करने वाले ने आरोप लगाया कि पीड़ित के खाते से करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन हुए हैं और वह एक गंभीर आर्थिक अपराध की जांच के दायरे में हैं। ठगों ने तत्काल गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर भय और भ्रम की स्थिति पैदा की, जिससे बुजुर्ग मानसिक दबाव में आ गए।
वीडियो कॉल पर ‘जांच’, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर
जांचकर्ताओं के अनुसार, इसके बाद पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर बनाए रखा गया। कई दिनों तक तथाकथित “जांच” और “खाता सत्यापन” के नाम पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसी दौरान ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए, जिन्हें “सुरक्षा प्रक्रिया” का हिस्सा बताया गया।
इस सुनियोजित प्रक्रिया के तहत पीड़ित से कुल ₹78.50 लाख विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। लगातार दबाव और डर के कारण पीड़ित किसी भी स्तर पर संदेह नहीं कर सके।
शिकायत के बाद खुला ठगी का जाल
कुछ समय बाद जब कॉल अचानक बंद हो गईं और किसी भी आधिकारिक एजेंसी की ओर से कोई लिखित नोटिस या संपर्क नहीं हुआ, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने नागपुर के साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
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पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू करते हुए डिजिटल मनी ट्रेल पर फोकस किया। बैंक ट्रांजैक्शन, खातों की लिंकिंग और फंड फ्लो के विश्लेषण से पता चला कि ठगी की राशि कई खातों के जरिए राजस्थान तक पहुंची है।
जयपुर से गिरफ्तारी, खाते फ्रीज
जांच के दौरान पुलिस की एक टीम जयपुर पहुंची, जहां से इस मामले में मुख्य लाभार्थी के रूप में सामने आए ओमप्रकाश भंवरलाल जाखड़ (49) को गिरफ्तार किया गया। स्थानीय सत्यापन के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे नागपुर लाया गया।
जांच के दौरान जिन बैंक खातों का उपयोग ठगी में किया गया था, उन्हें फ्रीज कर दिया गया। इन्हीं खातों से ₹34 लाख की राशि सुरक्षित कर कानूनी प्रक्रिया के तहत पीड़ित को लौटाई गई। पुलिस के अनुसार, शेष राशि की बरामदगी और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के प्रयास जारी हैं।
पुलिस की चेतावनी
पुलिस ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से जांच नहीं करती और न ही “सत्यापन” या “सुरक्षा प्रक्रिया” के नाम पर धनराशि ट्रांसफर करने को कहती है।
नागरिकों से अपील की गई है कि ऐसे किसी भी कॉल या संदेश पर सतर्क रहें, स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि करें और संदेह होने पर तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
