मुजफ्फरनगर (UP): Muzaffarnagar पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह पर देशभर में 85 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है। करीब 70 शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम टीम ने यह ऑपरेशन चलाया। दो आरोपी फरार बताए गए हैं, जिनकी तलाश जारी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम मॉनिटरिंग पोर्टल ‘प्रतिबिंब’ पर दर्ज शिकायतों से हुई। विभिन्न राज्यों से आई शिकायतों में जिन मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस और बैंक खातों का उल्लेख था, उनकी तकनीकी जांच में कई सुराग मुजफ्फरनगर जिले से जुड़े मिले। डिजिटल सर्विलांस और बैंक ट्रांजेक्शन की पड़ताल के बाद पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
फर्जी ट्रैवल पोर्टल बनाकर फंसाते थे शिकार
जांच में सामने आया कि गिरोह ने देश की नामी ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी MakeMyTrip की तर्ज पर एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। वेबसाइट को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह असली प्लेटफॉर्म जैसी लगे। उसमें बुकिंग इंटरफेस, ऑफर पेज और ग्राहक सेवा नंबर तक शामिल थे, जिससे लोगों को शक न हो।
आरोपी सस्ते हवाई टिकट और होटल बुकिंग के आकर्षक ऑफर दिखाकर लोगों को जाल में फंसाते थे। बुकिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राहकों को क्यूआर कोड भेजा जाता था और उसी के जरिये भुगतान कराने को कहा जाता था। भुगतान होते ही या तो पीड़ित को ब्लॉक कर दिया जाता था या फिर फर्जी कन्फर्मेशन भेज दिया जाता था। जब तक लोगों को ठगी का एहसास होता, रकम कई खातों में ट्रांसफर की जा चुकी होती थी।
पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा मुजफ्फरनगर के फुगाना निवासी से जुड़े एक बैंक खाते में पहुंचा था। यही खाता जांच का टर्निंग पॉइंट बना और इसके आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी गईं।
बड़ी मात्रा में उपकरण और बैंक किट बरामद
दबिश के दौरान पुलिस ने नौ मोबाइल फोन, 12 एटीएम कार्ड, 13 सिम कार्ड, दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, दो चेक बुक, एक पासबुक और विभिन्न बैंकों की सात प्री-एक्टिवेटेड बैंक किट बरामद कीं। इसके अलावा कीबोर्ड, माउस, वाई-फाई राउटर, मॉनिटर, सीपीयू और प्रिंटर भी जब्त किए गए। मौके से 5,610 रुपये नकद भी मिले।
जांच अधिकारियों का मानना है कि प्री-एक्टिवेटेड बैंक किट और किराए पर लिए गए खातों के जरिये रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में घुमाया जाता था, ताकि मनी ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाए। जब्त डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिससे ट्रांजेक्शन और संपर्कों की पूरी जानकारी मिल सके।
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किराए पर लिए जाते थे बैंक खाते
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे कमीशन के बदले लोगों से बैंक खाते, सिम कार्ड और एटीएम कार्ड किराए पर लेते थे। देश के अलग-अलग हिस्सों — और संभवतः विदेश से — संचालित साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम पहले इन खातों में डाली जाती थी।
आरोपी एक तय प्रतिशत कमीशन के रूप में रखते थे और शेष रकम अन्य खातों में ट्रांसफर कर देते थे या एटीएम कार्ड के जरिये नकद निकाल लेते थे। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह बड़े साइबर सिंडिकेट के लिए वित्तीय माध्यम के रूप में काम कर रहा था, जिससे ठगी की रकम तेजी से इधर-उधर की जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार छह आरोपियों ने पिछले दो महीनों में करीब 30 लाख रुपये के लेनदेन में सीधे भूमिका निभाई है। अब तक 85 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी से जुड़ी करीब 70 शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जिनमें से लगभग 60 लाख रुपये की रकम इन खातों से होकर गुजरी है।
छह गिरफ्तार, दो फरार
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अक्षय (फुगाना), हर्ष आर्या (सिकंदरपुर), भव्यांश (बेलड़ा), सचिन (नंदग्राम, गाजियाबाद), हरेंद्र (तुगलकपुर, हरिद्वार) और आर्यन (गांधीनगर, न्यू मंडी) के रूप में हुई है। राजा और अनुराग नामक दो आरोपी फरार हैं।
पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी वेबसाइट पर भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांच लें और अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड स्कैन करने से बचें, क्योंकि ठग अक्सर नामी ब्रांड के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को झांसे में लेते हैं।
