जोधपुर | राजस्थान के जोधपुर में साइबर अपराध के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेनदेन कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने करीब ₹21 लाख का अवैध ट्रांजैक्शन किया, जबकि इनके खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में करीब 80 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज पाई गई हैं।
यह कार्रवाई साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे विशेष साइबर अभियान के तहत की गई। पुलिस को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), गृह मंत्रालय के माध्यम से संदिग्ध बैंक खातों से जुड़ी खुफिया जानकारी मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर जोधपुर की रातानाडा थाना पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा किया।
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी या किराए पर लिए गए बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे थे। इन खातों को विभिन्न प्रकार के गेमिंग, निवेश और ऑनलाइन ठगी मामलों में प्रयोग किया जाता था, जहां पीड़ितों को झांसे में लेकर ठगी की रकम इन खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी।
पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम जमा होने के बाद आरोपी एटीएम कार्ड के जरिए नकद निकासी करते थे। निकाली गई राशि में से करीब 10 प्रतिशत कमीशन अपने पास रखकर शेष रकम को क्रिप्टोकरेंसी (USDT/Binance) के माध्यम से साइबर फ्रॉड गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाया जाता था। इस तरीके से बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल ट्रेल को जटिल बनाकर जांच से बचने की कोशिश की जाती थी।
अब तक की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास जिन 20 बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, उनके जरिए करीब ₹21 लाख का अवैध लेनदेन हुआ। हालांकि, इन खातों से जुड़े मामलों में देशभर में दर्ज साइबर शिकायतों में कुल फ्रॉड राशि लगभग ₹45 करोड़ तक बताई जा रही है, जिससे गिरोह के बड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है।
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पुलिस ने इस मामले में जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वे सभी युवा बताए जा रहे हैं और अलग-अलग इलाकों से जुड़े हैं। पूछताछ में संकेत मिले हैं कि आरोपी स्वयं पीड़ितों से सीधे संपर्क में नहीं आते थे, बल्कि केवल बैंक खातों और निकासी चैनल के रूप में काम कर रहे थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह के पीछे कौन से मुख्य हैंडलर और मास्टरमाइंड सक्रिय हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, म्यूल अकाउंट फ्रॉड वर्तमान में साइबर अपराध का एक बड़ा ट्रेंड बन चुका है। इसमें बेरोजगार युवाओं, छात्रों या जरूरतमंद लोगों को आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं या मौजूदा खातों को किराए पर लिया जाता है। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, फर्जी निवेश, ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में किया जाता है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और न ही किसी के कहने पर खाता किराए पर दें। ऐसा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और खाताधारक को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य खातों, मोबाइल नंबरों, क्रिप्टो वॉलेट्स और डिजिटल ट्रेल की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि यह नेटवर्क एक से अधिक राज्यों में सक्रिय रहा है।
यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि साइबर ठगी अब केवल तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले चुकी है, जिसमें बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग किया जा रहा है।
