जिम की आड़ में धर्मांतरण, यूपी पुलिस का सिपाही निकला मास्टरमाइंड

Team The420
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मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश | उत्तर प्रदेश पुलिस ने मिर्जापुर में कथित तौर पर चल रहे एक अवैध धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए राज्य पुलिस के एक सेवारत सिपाही को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि एक निजी जिम को महिलाओं को फंसाने और उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। यह मामला तब और गंभीर हो गया, जब जांच में सामने आया कि नेटवर्क के संचालन में एक पुलिसकर्मी की सक्रिय भूमिका थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह जिम महिलाओं को फिटनेस प्रशिक्षण के बहाने आकर्षित करने का केंद्र था। यहां दोस्ती और भावनात्मक रिश्तों के जरिए उन्हें भरोसे में लिया जाता था और बाद में कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला जाता था। जबरन धर्मांतरण, ब्लैकमेलिंग और मानसिक उत्पीड़न की शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच में इस नेटवर्क की परतें खुलीं।

जिम संचालन में पुलिसकर्मी की भूमिका

जांचकर्ताओं का कहना है कि गिरफ्तार सिपाही मिर्जापुर के रेलवे स्टेशन पर जीआरपी में तैनात था और लंबे समय से जिम के संचालन से जुड़ा हुआ था। जिम आधिकारिक दस्तावेजों में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत था, लेकिन पुलिस का दावा है कि वास्तविक नियंत्रण सिपाही के पास ही था।

पुलिस के मुताबिक, ड्यूटी खत्म करने के बाद वह नियमित रूप से जिम पहुंचता था और गतिविधियों पर नजर रखता था। जिम का दैनिक प्रबंधन एक सहयोगी के जिम्मे था, जिसे कागजों में मालिक बताया गया था, ताकि सिपाही की संलिप्तता छिपी रहे।

मुठभेड़ में ट्रेनर गिरफ्तार, नेटवर्क की कड़ी उजागर

जांच उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंची, जब पुलिस ने इस नेटवर्क के मुख्य ट्रेनर को जिले के जंगल क्षेत्र के पास मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया। इस दौरान अभियुक्त के पैर में गोली लगी और इलाज के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।

पुलिस के अनुसार, यही ट्रेनर महिलाओं से संपर्क साधने, दोस्ती बढ़ाने और निजी रिश्तों में फंसाने की मुख्य भूमिका निभाता था। आरोप है कि वह महिलाओं के निजी वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था और इसी दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करता था।

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भरोसे का दुरुपयोग और दबाव की रणनीति

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी जिम के माहौल में बने भरोसे और भावनात्मक नजदीकियों का फायदा उठाता था। पीड़ितों को मानसिक और सामाजिक दबाव में रखा जाता था। सहयोग न करने की स्थिति में उनकी निजी जानकारी या वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी।

पुलिस ने जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है, ताकि अन्य पीड़ितों, संभावित सहयोगियों और नेटवर्क की व्यापकता का पता लगाया जा सके।

राज्यव्यापी कार्रवाई का हिस्सा

मिर्जापुर का यह मामला उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण नेटवर्क के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा बताया जा रहा है। हाल के सप्ताहों में पुलिस ने जिम, प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य निजी संस्थानों से जुड़े ऐसे कई मामलों में जांच और कार्रवाई की है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि एक सेवारत सिपाही की गिरफ्तारी अधिकार के दुरुपयोग और सार्वजनिक विश्वास के उल्लंघन का गंभीर मामला है। आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी।

फंडिंग और बाहरी कनेक्शन की जांच

अधिकारियों के अनुसार, नेटवर्क के संभावित वित्तीय स्रोतों, फंडिंग और बाहरी संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इसी तरह की गतिविधियां अन्य स्थानों पर भी संचालित हो रही थीं।

पुलिस ने अपील की है कि जिन लोगों को जिम के जरिए फंसाया गया या दबाव में लाया गया हो, वे सामने आएं। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि पीड़ितों की गोपनीयता और कानूनी सहायता सुनिश्चित की जाएगी।

वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में किसी भी पद या पहचान को ढाल नहीं बनने दिया जाएगा और सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला निजी संस्थानों की निगरानी और बल या धोखे के माध्यम से धर्मांतरण के खिलाफ सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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