बिजली मीटर बना कमाई का जरिया, संविदाकर्मी लाइनमैन गिरफ्तार

Team The420
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विकासपुरी बिजलीघर में बिजली मीटर उतारने और ‘ओके रिपोर्ट’ देने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में एक संविदाकर्मी लाइनमैन को एंटी-करप्शन टीम ने ₹6,000 लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, जबकि विभागीय स्तर पर उसकी तत्काल बर्खास्तगी की तैयारी शुरू कर दी गई है।

आधिकारिक रसीद के बाद भी लंबित रहा काम

लिसाड़ी गेट के अहमदनगर निवासी मोहम्मद राशिद ने बताया कि उन्होंने मीटर बदलवाने के लिए नियमानुसार आवेदन किया था और जेलचुंगी स्थित कार्यालय में ₹50 की आधिकारिक रसीद भी कटवाई थी। रसीद विकासपुरी बिजलीघर में जमा कराने के बावजूद कई दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, जूनियर इंजीनियर से संपर्क करने पर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ और उन्हें इधर-उधर भेजा जाता रहा। इसी दौरान संविदाकर्मी लाइनमैन सरफराज से मुलाकात हुई, जिसने मीटर उतारने और ‘ओके रिपोर्ट’ देने के लिए ₹13,000 की मांग की। बाद में सौदा ₹6,000 में तय हुआ।

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सत्यापन के बाद बिछाया गया ट्रैप

मोहम्मद राशिद ने पूरे मामले की शिकायत एंटी-करप्शन टीम से की। टीम ने प्राथमिक जांच कर आरोप की पुष्टि की और ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। तय रणनीति के तहत शिकायतकर्ता को चिन्हित नोटों के साथ विकासपुरी बिजलीघर भेजा गया।

जैसे ही आरोपी ने रकम ली, मौके पर मौजूद टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया और रिश्वत की रकम बरामद कर ली। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की गई और आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू की गई।

विभागीय बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू

अधीक्षण अभियंता शहर ने कहा कि मामले की पूरी रिपोर्ट अधिशासी अभियंता से तलब की गई है। रिपोर्ट मिलते ही संविदाकर्मी के खिलाफ बर्खास्तगी और अन्य विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रिश्वतखोरी के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी।

शिकायत निस्तारण प्रणाली पर उठे सवाल

इस घटना ने बिजली विभाग की शिकायत निस्तारण व्यवस्था और संविदाकर्मियों की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपभोक्ता द्वारा आधिकारिक शुल्क जमा करने के बावजूद काम लंबित रहना और फिर रिश्वत मांगने का आरोप विभागीय प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर चिंता बढ़ाता है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता की अपील

एंटी-करप्शन अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि किसी भी सरकारी कार्य के बदले यदि कोई कर्मचारी पैसे की मांग करे तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रैप कार्रवाई की जाएगी।

आगे की जांच

टीम आरोपी की भूमिका और संभावित अन्य संलिप्तताओं की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह अकेला मामला है या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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