मेरठ: शहर के व्यस्त आबूलेन बाजार स्थित रघुनंदन ज्वैलर्स शोरूम में दिनदहाड़े करीब ₹1 करोड़ मूल्य के 600–650 ग्राम सोने के आभूषण ठगी कर ले जाए जाने से सर्राफा कारोबार में हड़कंप मच गया। पूरी वारदात एक सुनियोजित फोन कॉल से शुरू हुई और नकद भुगतान के भ्रम का फायदा उठाकर आरोपियों ने जेवर लेकर फरार होने में सफलता हासिल की।
व्हाट्सएप कॉल से तय हुआ सौदा
दोपहर करीब एक बजे ‘कृष्णा’ नाम के व्यक्ति ने व्हाट्सएप कॉल कर खुद को दिल्ली का कारोबारी बताया और बड़ी मात्रा में सोना खरीदने की बात कही। उसने शोरूम आने में असमर्थता जताते हुए अपने “भतीजे” को भेजने की जानकारी दी। कुछ देर बाद एक युवक शोरूम पहुंचा और बताए अनुसार आभूषण देखने लगा। उसने करीब 600 से 650 ग्राम सोना पसंद किया।
भुगतान को लेकर फोन पर हुई बातचीत में कॉल करने वाले व्यक्ति ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में असमर्थता जताई और नकद रकम भिजवाने की बात कही।
नकद देने पहुंचे चार युवक, जेवर लेकर निकला ‘भतीजा’
करीब आधे घंटे बाद चार युवक शोरूम पहुंचे। उन्होंने नकद भुगतान किया, जिसके बाद चयनित आभूषण उस युवक को दे दिए गए, जो खुद को ‘भतीजा’ बता रहा था। जैसे ही वह शोरूम से निकला, नकद देने आए चारों युवकों ने भुगतान रोकने की बात कह दी।
उनका दावा था कि वे सोना खरीदने नहीं आए थे, बल्कि केवल अपने बैंक खाते में एंट्री दिखाने के लिए नकद राशि लाए थे। रुड़की रोड निवासी कारोबारी प्रवीण शर्मा ने बताया कि उन्हें भी ‘कृष्णा’ नाम के व्यक्ति ने शोरूम भेजा था और वे सोना लेकर जाने वाले युवक को नहीं जानते।
दो ‘कृष्णा’ के नाम से रचा गया भ्रम
जांच में सामने आया है कि पूरे घटनाक्रम में ‘कृष्णा’ नाम के दो अलग-अलग व्यक्तियों का इस्तेमाल किया गया—
- एक जिसने प्रवीण शर्मा को शोरूम भेजा
- दूसरा जिसने फोन पर खुद को खरीदार बताकर सौदा तय किया
इसी भ्रम के कारण नकद भुगतान और आभूषण की डिलीवरी के बीच तालमेल टूट गया और आरोपियों ने मौके का फायदा उठाकर जेवर लेकर फरार हो गए।
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दो संदिग्ध हिरासत में, कई से पूछताछ
पुलिस ने राजवीर और पंकज निषाद नाम के दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जो दिल्ली में रह रहे थे। इसके अलावा दो अन्य लोगों से भी पूछताछ जारी है। मामले की जांच के लिए दो पुलिस टीमें और स्वाट टीम लगाई गई है।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
अधिकारियों के अनुसार शोरूम और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि जेवर लेकर जाने वाले युवक और अन्य संदिग्धों की पहचान की जा सके। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल कम्युनिकेशन की भी जांच की जा रही है।
सर्राफा बाजार में आक्रोश
घटना की सूचना मिलते ही मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और बड़ी नकद डील में सत्यापन प्रक्रिया को अनिवार्य करने की मांग की। कारोबारियों का कहना है कि इस तरह की ठगी रोकने के लिए पहचान सत्यापन, भुगतान पुष्टि और डिलीवरी प्रोटोकॉल सख्त किए जाने चाहिए।
आगे की कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और नकद लेनदेन की जांच के आधार पर जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा। अधिकारियों ने सर्राफा कारोबारियों को सलाह दी है कि बड़ी डिलीवरी केवल भुगतान की पुष्टि और खरीदार की पहचान सत्यापन के बाद ही की जाए।
मामले को सुनियोजित संगठित ठगी मानते हुए पुलिस बहु-राज्यीय कनेक्शन की भी जांच कर रही है।
