लखनऊ: सराफा कारोबार में निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच देकर सेवानिवृत्त इंजीनियर से ₹90 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। बीबीडी क्षेत्र के अनौरा कला गांव निवासी 67 वर्षीय राजेंद्र कुमार सिंह की तहरीर पर पीजीआई के तेलीबाग निवासी अरविंद तिवारी, उसके पिता राजकेसर, पत्नी कंचन और बेटे यश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि आरोपियों ने साझेदारी का झांसा देकर रकम ली, लेकिन न तो निवेश लौटाया और न ही कोई लाभ दिया।
पीड़ित के अनुसार अक्टूबर 2024 में आईसीआईसीआई बैंक की कठौता शाखा में उनकी मुलाकात अरविंद से हुई थी। बातचीत के दौरान अरविंद ने खुद को पारिवारिक आभूषण व्यवसाय से जुड़ा बताते हुए निवेश पर अच्छा रिटर्न देने का भरोसा दिलाया। भरोसा जमाने के लिए वह अपने परिजनों के साथ पीड़ित के घर आने-जाने लगा। इसके बाद उसने सुशांत गोल्फ सिटी में सराफ की दुकान खोलने का प्रस्ताव रखा और पीड़ित को भागीदार बनाने का दावा किया।
राजेंद्र ने पहले चरण में ₹20 लाख आरोपी को दिए। कुछ समय बाद आरोपी ने दुकान विस्तार के नाम पर और रकम की मांग की। पीड़ित ने अपने बेटे सर्वजीत के नाम पर ₹70 लाख का ऋण लेकर यह राशि भी अरविंद को सौंप दी। आरोपियों ने रकम के बदले सोने के गहने सुरक्षा के तौर पर गिरवी रखे, जिससे निवेश सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया गया।
समय बीतने पर जब न तो मुनाफा मिला और न ही मूलधन लौटा, तो पीड़ित ने संपर्क करना चाहा, लेकिन आरोपियों ने कॉल और संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया। संदेह होने पर वह सुशांत गोल्फ सिटी स्थित बताई गई दुकान पर पहुंचे, जहां राजकेसर ने अरविंद का दुकान से कोई संबंध होने से इनकार कर दिया। इसके बाद जब पीड़ित गिरवी रखे गहने बेचने गए तो वे नकली निकले।
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मामला सामने आने पर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इंस्पेक्टर के अनुसार चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और गिरवी रखे गए गहनों की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपियों ने इसी तरह अन्य लोगों को भी निवेश के नाम पर ठगा है। बैंक खातों में रकम के ट्रांसफर, ऋण दस्तावेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर आरोपियों से पूछताछ और संभावित गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में निवेश और साझेदारी के नाम पर ठगी के मामलों में वृद्धि हुई है, जहां भरोसा जीतने के लिए आरोपी सामाजिक संपर्क बढ़ाते हैं और सुरक्षा के नाम पर नकली गहने या दस्तावेज देते हैं। बिना लिखित अनुबंध, वैध फर्म पंजीकरण और वित्तीय सत्यापन के बड़ी रकम निवेश करना जोखिम भरा होता है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कारोबार में निवेश से पहले संबंधित फर्म का जीएसटी पंजीकरण, दुकान का लाइसेंस, बैंक विवरण और लिखित समझौता अवश्य जांच लें। संदिग्ध प्रस्ताव मिलने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।
