लखनऊ: कॉपर स्क्रैप के नाम पर कागजी खरीद-फरोख्त दिखाकर 300 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी बिलिंग करने वाले संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) की बहु-राज्यीय कार्रवाई में 19 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के रूप में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का दावा कर सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचाया। अदालत ने तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
कार्रवाई लखनऊ, दिल्ली और भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सोनौली सहित कई शहरों में एक साथ की गई। 100 से अधिक अधिकारियों की टीमों ने समन्वित ऑपरेशन में दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, फर्जी इनवॉइस, मुहरें और शेल कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और अलग-अलग राज्यों में कागजी फर्मों के जरिये बिलिंग का चक्र चलाया जा रहा था।
जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी दीपांशु गर्ग नौकरों और परिचितों के नाम पर शेल कंपनियां बनाकर कॉपर स्क्रैप की काल्पनिक सप्लाई दिखाता था। वर्क कॉन्ट्रैक्ट सप्लायरों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी बिल काटे जाते थे, जबकि वास्तविक माल की कोई आवाजाही नहीं होती थी। बैंक खातों के माध्यम से रकम को घुमाकर लेनदेन को वास्तविक दिखाने की कोशिश की जाती थी और बाद में धन अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
डीजीजीआई को इस रैकेट की गोपनीय सूचना मिलने के बाद ई-वे बिल, जीएसटी रिटर्न, बैंकिंग ट्रेल और फर्मों के पंजीकरण का डेटा एनालिसिस किया गया। संदिग्ध पैटर्न मिलने पर मल्टी-लोकेशन सर्च ऑपरेशन की योजना बनाई गई। छापेमारी के दौरान कई फर्जी जीएसटीआईएन, कागजी खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लाभार्थियों की पहचान की जा रही है।
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प्राथमिक जांच से संकेत मिले हैं कि फर्जी आईटीसी के जरिये टैक्स देनदारी कम दिखाकर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे मामलों में कागजी कंपनियां केवल बिलिंग चैन बनाने के लिए बनाई जाती हैं, जिनका वास्तविक कारोबार नगण्य होता है। खातों में पैसा कुछ समय के लिए घुमाकर आगे भेज दिया जाता है, जिससे लेनदेन वैध प्रतीत हो।
सोनौली कनेक्शन की भी गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सीमा पार लेनदेन या फर्जी आयात-निर्यात के जरिये बिलिंग को वैध दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई। जांच एजेंसियों को आशंका है कि नेटवर्क का दायरा अन्य राज्यों तक फैला हो सकता है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी आईटीसी घोटाले जीएसटी प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। डेटा एनालिटिक्स, ई-इनवॉइसिंग और रियल-टाइम ट्रैकिंग के बावजूद शेल कंपनियों के माध्यम से कागजी लेनदेन दिखाकर टैक्स चोरी की कोशिशें की जाती हैं। ऐसे मामलों में बैंकिंग ट्रेल, ई-वे बिल मिलान और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका अहम होती है।
डीजीजीआई अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर फर्जी फर्मों की पूरी श्रृंखला, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और नेटवर्क के मास्टरमाइंड की पहचान करने में जुटी है। जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से मिले डेटा के आधार पर अन्य संदिग्ध फर्मों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
एजेंसियों ने संकेत दिया है कि फर्जी बिलिंग और आईटीसी धोखाधड़ी के खिलाफ संयुक्त अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि टैक्स सिस्टम के दुरुपयोग पर सख्त निगरानी रखी जाएगी और ऐसे संगठित नेटवर्क को तोड़ने के लिए मल्टी-स्टेट ऑपरेशन तेज किए जाएंगे।
