होटल कमरा बना डिजिटल जेल: लखनऊ में 14 दिन कैद कर ₹90 लाख लूटे

लग्जरी होटल बना ‘डिजिटल जेल’, 14 दिन बंदी रख महिला से ₹90 लाख ठगे

Team The420
5 Min Read

दिल्ली और नोएडा के लग्जरी होटलों के कमरों को फर्जी ऑफिस में बदलकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का हाईटेक साइबर ठगी रैकेट चलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। गिरोह ने आलमबाग के एक ट्रांसपोर्टर की पत्नी को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 14 दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और ₹90 लाख ट्रांसफर करा लिए। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कथित सरगना जीतू फरार है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनीष कुमार उर्फ आकाश, इरशाद और मयंक श्रीवास्तव के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ था और इंडोनेशिया, म्यांमार व थाईलैंड में बैठे हैंडलर स्क्रिप्ट, कॉलिंग डेटा और तकनीकी सपोर्ट उपलब्ध करा रहे थे।

Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology

जांच के अनुसार आरोपी दिल्ली के चांदनी चौक और पहाड़गंज तथा नोएडा के परी चौक के पास महंगे होटलों में कमरे किराये पर लेकर उन्हें फर्जी सरकारी दफ्तर जैसा सेटअप देते थे। लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, हाई-स्पीड इंटरनेट, आधिकारिक बैकग्राउंड और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वीडियो कॉल की जाती थी। जीतू वर्दी पहनकर कैमरे के सामने बैठता था ताकि पूछताछ वास्तविक लगे और पीड़ित डर जाए।

मामला तब उजागर हुआ जब आलमबाग के ट्रांसपोर्टर राकेश बाजपेयी की पत्नी वीना ने शिकायत दर्ज कराई। 26 जनवरी को उन्हें व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को एंटी-टेरर एजेंसी का अधिकारी बताया। इसके बाद उन्हें वर्दी पहने दूसरे व्यक्ति से जोड़ा गया, जिसने मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का आरोप लगाकर तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी।

अगले 14 दिनों तक महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया। उसे फोन बंद न करने, किसी से बात न करने और लगातार कैमरे के सामने रहने के लिए मजबूर किया गया। इस दौरान डर और दबाव बनाकर उससे अलग-अलग खातों में कई किश्तों में ₹90 लाख ट्रांसफर कराए गए।

जांच में सामने आया कि मयंक श्रीवास्तव गिरोह के लिए किराये के बैंक खाते उपलब्ध कराता था। खाताधारकों को ₹5,000 से ₹10,000 देकर उनके खाते ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। बदले में मयंक को कुल रकम का तीन से पांच प्रतिशत कमीशन मिलता था।

वित्तीय विश्लेषण में पता चला कि पिछले कुछ महीनों में मयंक के खाते में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से ₹1.06 करोड़ जमा हुए थे, जो साइबर ठगी से जुड़े थे। रकम को तुरंत अलग-अलग खातों में घुमाकर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था और फिर विदेश में बैठे हैंडलरों को भेज दिया जाता था, जिससे ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाए।

जांच एजेंसियों का मानना है कि विदेशी मॉड्यूल टारगेट लिस्ट और कॉलिंग स्क्रिप्ट भेजता था, जबकि भारत में मौजूद आरोपी वीडियो कॉल कर डराने, निगरानी रखने और पैसा ट्रांसफर कराने का काम करते थे। कई अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है और संदिग्ध क्रिप्टो वॉलेट ट्रेस किए जा रहे हैं।

छापेमारी में लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, फर्जी पहचान पत्र, बैंक लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल डेटा बरामद किया गया है। होटल बुकिंग रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि गिरोह के अन्य ठिकानों और सहयोगियों का पता लगाया जा सके।

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी तेजी से बढ़ रही है, जिसमें जालसाज खुद को पुलिस या केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पूछताछ का नाटक करते हैं और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे वसूलते हैं। पीड़ितों को अलग-थलग रखकर उन पर मानसिक दबाव बनाया जाता है।

लोगों से अपील की गई है कि कोई भी जांच एजेंसी व्हाट्सऐप या वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पैसे नहीं मांगती। ऐसी कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

फरार आरोपी जीतू की तलाश जारी है और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

हमसे जुड़ें

Share This Article