डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹3 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी के मामले में कोलकाता पुलिस ने एक और सिम बॉक्स गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान 12 सिम बॉक्स, 2,250 सिम कार्ड, 17 मोबाइल फोन, नौ राउटर, लैपटॉप और अन्य टेलीकॉम उपकरण बरामद किए हैं, जिससे अवैध कॉल रूटिंग नेटवर्क के बड़े पैमाने पर संचालन के संकेत मिले हैं।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 38 वर्षीय मोहम्मद अमजद के रूप में हुई है, जिसे सेंट्रल कोलकाता के अमहर्स्ट स्ट्रीट इलाके से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पहले पकड़े गए एक अन्य सिम बॉक्स ऑपरेटर से मिली जानकारी के आधार पर की गई।
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‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर करोड़ों की ठगी
जांच में सामने आया कि अक्टूबर में बेहाला के एक कारोबारी को फोन कर बताया गया कि उसके नाम पर भेजे गए पार्सल में प्रतिबंधित दवाएं मिली हैं और उस पर CBI तथा ED जांच चल रही है। इसके बाद खुद को केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताने वाले ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए दंपति को ‘नजरबंदी’ में होने का दावा किया और मोबाइल कैमरा ऑन रखने को कहा।
वीडियो कॉल के दौरान फर्जी पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज दिखाए गए। बाद में खुद को आईपीएस अधिकारी बताने वाले दो अन्य लोग भी कॉल में शामिल हुए और गिरफ्तारी की धमकी दी। आरोपियों ने कहा कि यदि वे पैसे ट्रांसफर कर देंगे तो कार्रवाई से बच जाएंगे। डर के माहौल में दंपति ने कुल ₹3.01 करोड़ आरोपियों के खातों में भेज दिए।
जब ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
सिम बॉक्स से छिपाया जाता था कॉल का असली स्रोत
पुलिस के मुताबिक ठग सामान्य मोबाइल से कॉल नहीं करते थे बल्कि सिम बॉक्स नामक उपकरण का इस्तेमाल करते थे। इस तकनीक से अंतरराष्ट्रीय कॉल इंटरनेट के जरिए लोकल कॉल की तरह दिखाई देती है, जिससे असली लोकेशन छिप जाती है और सरकारी निगरानी से बचना आसान हो जाता है। एक साथ कई सिम कार्ड डालकर बड़ी संख्या में कॉल की जा सकती हैं।
बांग्लादेश-मलेशिया कनेक्शन की जांच
जांच में पता चला है कि गिरोह वर्चुअल नंबर और वीपीएन के जरिए लोकेशन छिपाता था। पुलिस को बांग्लादेश और मलेशिया से जुड़े लिंक भी मिले हैं। पहले गिरफ्तार आरोपी को अवैध कॉल रूटिंग नेटवर्क चलाने में सक्रिय पाया गया था, जबकि गिरोह के सरगना के रूप में त्रिपुरा निवासी एक व्यक्ति का नाम सामने आया है।
टेलीकॉम विभाग से मिली तकनीकी जानकारी और निगरानी के बाद पुलिस ने पहले एक आरोपी को बागुईआटी इलाके से सिम बॉक्स के साथ पकड़ा था। उसी से मिली जानकारी के आधार पर अमहर्स्ट स्ट्रीट में छापा मारकर दूसरी गिरफ्तारी की गई।
अवैध टेलीकॉम नेटवर्क का खुलासा
बरामद उपकरणों से संकेत मिलता है कि गिरोह बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय कॉल को लोकल कॉल में बदलकर साइबर ठगी को अंजाम देता था। इस तरीके से कॉल ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है और ठग अलग-अलग शहरों और देशों से संचालित हो सकते हैं।
पुलिस अब बरामद सिम कार्ड के स्रोत, बैंक खातों की मनी ट्रेल और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि सिम कार्ड फर्जी दस्तावेजों से लिए गए थे या किसी एजेंट के जरिए जुटाए गए।
साइबर ठगी के नए तरीकों पर अलर्ट
अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी एजेंसी कॉल और वीडियो वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे मांगना एक उभरता हुआ साइबर फ्रॉड पैटर्न है। आम लोगों को सलाह दी गई है कि किसी भी कॉल पर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वालों को पैसे न भेजें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि होने पर केंद्रीय एजेंसियों से भी सहयोग लिया जाएगा।
