बेंगलुरु: कर्नाटक में साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य की विशेष साइबर कमांड ने 68 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग म्यूल बैंक खातों का संचालन कर ऑनलाइन ठगी से हासिल ₹85.05 करोड़ की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर निकालने में शामिल थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह अभियान दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच राज्यभर में चलाया गया। इस दौरान ऐसे बैंक खातों का बड़ा जाल सामने आया, जिन्हें फर्जी या दुरुपयोग किए गए दस्तावेजों के आधार पर खोला गया था और जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और तुरंत निकालने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस ने कुल 869 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है, जो विभिन्न साइबर अपराधों से जुड़े पाए गए। इन खातों को अलग-अलग मॉड्यूल के जरिए संचालित किया जा रहा था ताकि धन का लेयरिंग कर ट्रांजैक्शन ट्रेल को जटिल बनाया जा सके और जांच एजेंसियों से बचा जा सके।
इस कार्रवाई के दौरान 60 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, पहचान की चोरी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। बैंक ट्रांजैक्शन ट्रेल, सिम कार्ड लिंक और डिजिटल उपकरणों के विश्लेषण के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई और कई जिलों में एक साथ छापेमारी कर गिरफ्तारियां की गईं।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी मुख्य रूप से खाते उपलब्ध कराने वाले, मध्यस्थ और नकदी निकालने वाले थे। कई मामलों में खातों में रकम आते ही आरोपी एटीएम से तुरंत नकदी निकालकर गिरोह के अन्य सदस्यों को सौंप देते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन दिया जाता था।
छापेमारी के दौरान एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल लेनदेन के समन्वय और गिरोह के भीतर संपर्क के लिए किया जा रहा था। जब्त डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क के मास्टरमाइंड और अन्य लाभार्थियों की पहचान की जा सके।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन म्यूल खातों का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की साइबर ठगी में किया जा रहा था, जिनमें फर्जी अधिकारी बनकर कॉल करना, निवेश घोटाले, ओटीपी आधारित धोखाधड़ी और फर्जी कस्टमर केयर स्कैम शामिल हैं। कई खातों के माध्यम से रकम को तेजी से इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था, जिससे पीड़ितों के लिए पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को छोटी रकम का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था या उनसे खाते की पहुंच साझा करवा लेता था। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और निकालने के लिए किया जाता था।
जांच एजेंसियां अब वित्तीय ट्रेल को मैप करने, शेष संदिग्ध खातों को फ्रीज करने और अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच में जुटी हैं। आशंका है कि इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों में सक्रिय संगठित साइबर गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूल खाते ऑनलाइन ठगी की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गए हैं, क्योंकि इनके जरिए असली अपराधी खुद को धन के प्रवाह से दूर रखते हैं। बड़ी संख्या में खातों की पहचान से यह संकेत मिलता है कि ठगी का यह तंत्र सुव्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा था।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक खाते, डेबिट कार्ड या ओटीपी की जानकारी साझा न करें और किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर खाता न खोलें या सिम कार्ड उपलब्ध न कराएं।
साइबर ठगी के मामलों में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने या साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है, ताकि समय रहते रकम को फ्रीज किया जा सके।
जांच जारी है और डिजिटल फॉरेंसिक के आधार पर आगे और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
