राज्य जीएसटी विभाग ने फर्जी पते और जाली दस्तावेजों के जरिए चल रही चार बोगस फर्मों का पर्दाफाश किया है, जिन्होंने मिलकर करीब ₹27 करोड़ की जीएसटी चोरी की। विभागीय अधिकारियों की तहरीर पर कल्याणपुर थाने में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जांच में सामने आया कि जिन पतों पर फर्मों का पंजीकरण दिखाया गया था, वहां कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं थी। गोविंदनगर रामलीला मैदान के पास जिस पते पर ‘सर्वश्री महाकाल ट्रेडर्स’ के नाम से फर्म संचालित दिखायी गई, वह सत्यापन में फर्जी निकला। वहां रहने वाले मकान मालिक ने ऐसे किसी व्यक्ति या फर्म की जानकारी होने से इनकार कर दिया। इस फर्म के जरिए करीब ₹35.73 लाख की कर चोरी का मामला सामने आया है।
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विभाग के अनुसार ‘एपेक्स एंटरप्राइजेज’ नाम की फर्म ने पनकी बाईपास क्षेत्र के एक फर्जी पते पर जीएसटी पंजीकरण कराया था। जांच के दौरान मौके पर कोई व्यापार नहीं मिला। यह फर्म राजस्थान के बूंदी निवासी गुरप्रीत सिंह द्वारा संचालित बताई गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस फर्म ने कागजों पर ₹49.16 करोड़ का कारोबार दिखाया लेकिन ₹11.45 करोड़ का कर जमा नहीं किया। वहीं 2025-26 में मई तक ₹18.05 करोड़ की बिक्री दिखाकर करीब ₹4.13 करोड़ की जीएसटी चोरी की गई।
दूसरे मामले में ‘किसान एंटरप्राइजेज’ ने अगस्त 2024 में फर्जी पते पर पंजीकरण कराया। जांच में पता चला कि फर्म की संचालिका हरियाणा निवासी ज्योति ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी नंबर हासिल किया। 2024-25 में ₹1.95 करोड़ की बिक्री दिखाकर लगभग ₹35 लाख कर नहीं दिया गया, जबकि 2025-26 में मई तक ₹18.94 करोड़ का कारोबार दिखाकर करीब ₹3.40 करोड़ की चोरी की गई।
तीसरे मामले में मुरादाबाद निवासी मोहम्मद वासि ने ‘वारिस ट्रेडर्स’ के नाम से कानपुर में फर्जी फर्म बनाकर प्लास्टिक रेजिन की खरीद-बिक्री दर्शाई। जांच में पाया गया कि यह लेन-देन केवल कागजों पर था और इसके जरिए वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में करीब ₹7.24 करोड़ की अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल की गई।
अधिकारियों के अनुसार इन फर्मों ने कूट रचित बिल और फर्जी लेन-देन दिखाकर कर देनदारी से बचने और आईटीसी का लाभ लेने का प्रयास किया। विभाग अब संबंधित जीएसटी पंजीकरण निरस्त करने और वित्तीय लेन-देन की परतें खंगालने की प्रक्रिया में जुटा है।
पुलिस का कहना है कि फर्जी फर्मों के जरिए की जा रही कर चोरी से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान होता है बल्कि वैध व्यापारियों के लिए भी प्रतिस्पर्धा असंतुलित हो जाती है। जांच में बैंक खातों, डिजिटल दस्तावेजों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
मामले में आगे और नाम सामने आने की संभावना है। विभागीय अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऐसे नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और फर्जी पंजीकरण के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
