नई दिल्ली | भारत-ईयू की ‘मदर ऑफ ऑल डील’ फाइनल, 90% यूरोपीय सामान होंगे सस्तेभारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग 18 वर्षों तक चली लंबी और जटिल बातचीत के बाद ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस बहुप्रतीक्षित करार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार देते हुए इसे भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया है। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने अधिकांश उत्पादों पर टैरिफ को समाप्त करने या उसमें भारी कटौती करने पर सहमति जताई है।
सरकारी और यूरोपीय संघ के साझा आकलन के अनुसार, इस समझौते के लागू होने के बाद भारत को निर्यात किए जाने वाले 90 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क या तो पूरी तरह खत्म कर दिए जाएंगे या उनमें उल्लेखनीय कमी की जाएगी। इसका सीधा असर कारों, केमिकल्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल उपकरणों, खाद्य उत्पादों और एयरोस्पेस से जुड़े सामानों की कीमतों पर पड़ने की संभावना है।
यूरोपीय संघ का कहना है कि इस समझौते से भारतीय बाजार में उसके निर्यात को मजबूती मिलेगी, जबकि भारत के लिए यूरोप के 27 देशों के विशाल और उच्च क्रय-शक्ति वाले बाजार तक पहुंच आसान होगी। व्यापार विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2032 तक भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो सकता है।
उपभोक्ताओं को कहां मिलेगी सीधी राहत
इस फ्री ट्रेड डील का असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है। कार और कमर्शियल व्हीकल्स पर आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने पर सहमति बनी है, हालांकि इसके लिए हर साल 2.5 लाख वाहनों का आयात कोटा तय किया गया है। इससे आयातित यूरोपीय कारों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है।
इसी तरह, बीयर पर 50 प्रतिशत और शराब पर 40 प्रतिशत तक टैरिफ कटौती की जाएगी। जैतून का तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर लगने वाले शुल्क पूरी तरह समाप्त होंगे। फलों के जूस और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर टैरिफ हटने से इनके दाम भी कम हो सकते हैं।
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उद्योगों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
केमिकल्स, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर को इस समझौते से विशेष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। मशीनरी पर 44 प्रतिशत तक और केमिकल्स पर 22 प्रतिशत तक लगने वाले टैरिफ को काफी हद तक समाप्त किया जाएगा। दवाओं और मेडिकल उत्पादों पर 11 प्रतिशत तक के शुल्क में कटौती से स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े आयात सस्ते हो सकते हैं।
इसके अलावा, एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट पर लगने वाले टैरिफ को पूरी तरह शून्य कर दिया गया है, जिससे भारत के एविएशन और एयरोस्पेस सेक्टर में तकनीक, निवेश और सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं।
रोजगार, निवेश और रणनीतिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में बढ़ोतरी से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। छोटे और मझोले उद्योगों को यूरोपीय बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का मौका मिलेगा।
यूरोपीय संघ ने यह भी घोषणा की है कि वह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के लिए भारत को अगले दो वर्षों में 500 मिलियन यूरो की सहायता देगा। इसके साथ ही ट्रेडमार्क, डिजाइन, कॉपीराइट और व्यापारिक रहस्यों की सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
जानकारों के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि चीन और अमेरिका पर निर्भरता कम करने की साझा रणनीति का भी हिस्सा है। कानूनी और प्रक्रियागत औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे कीमतों में राहत के साथ-साथ भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका और मजबूत होगी।
