भारत-ईयू ने किया ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता फाइनल, वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को करेगा कवर

Team The420
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लगभग बीस वर्षों तक चली जटिल और लंबी बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया है। इस मेगा करार को वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि यह मिलकर दुनिया के कुल व्यापार के करीब एक-तिहाई हिस्से और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 25 प्रतिशत को कवर करता है।

बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच इस समझौते को भारत की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक उपलब्धि माना जा रहा है। सरकारी आकलन के अनुसार, यह करार भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जिससे निर्यात, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

इस समझौते के तहत भारतीय उद्योगों को यूरोपीय संघ के 27 देशों के विशाल और उच्च क्रय-शक्ति वाले बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से अटके इस करार से दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य रखा गया है।

मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलने की संभावना है। मशीनरी, टेक्सटाइल, लेदर उत्पाद, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों में टैरिफ में संभावित कटौती से भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं। उद्योग जगत का मानना है कि इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

इसके साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ जैसी पहलों को भी इस करार से मजबूती मिलने की उम्मीद है। यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर सकता है, जिससे रोजगार सृजन को भी बल मिलने की संभावना है।

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सेवा क्षेत्र के लिए नए अवसर

सेवा क्षेत्र के लिहाज से भी यह समझौता भारत के लिए अहम माना जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएं, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग और अन्य पेशेवर सेवाओं में भारतीय कंपनियों को यूरोप में अधिक अवसर मिल सकते हैं। जानकारों का कहना है कि इससे न केवल सेवा निर्यात बढ़ेगा, बल्कि कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए नए बाजार भी खुल सकते हैं।

निवेश और भरोसे का असर

यूरोपीय संघ जैसे बड़े आर्थिक ब्लॉक के साथ व्यापक व्यापार समझौते से भारत में विदेशी निवेश के प्रवाह को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्थिर नियमों और दीर्घकालिक व्यापार ढांचे के कारण निवेशकों का भरोसा मजबूत होने की बात कही जा रही है। खास तौर पर ग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

लागू होने से पहले कानूनी प्रक्रिया

हालांकि समझौते को लागू करने से पहले भारत और यूरोपीय संघ दोनों को अपनी-अपनी कानूनी और संस्थागत प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। अनुमान है कि आने वाले महीनों में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं और इसके बाद एक वर्ष के भीतर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर सतर्क रुख अपनाए जाने के संकेत भी मिले हैं। इन क्षेत्रों में घरेलू हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीमित रियायतें दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

वैश्विक रणनीति में अहम कड़ी

यह समझौता हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए अन्य बड़े व्यापारिक करारों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले भारत यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन और ब्रिटेन के साथ भी अहम समझौते कर चुका है। जानकारों का मानना है कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक आर्थिक मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा और देश को एक भरोसेमंद तथा दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करेगा।

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