निवेश ठगी से सबसे बड़ा नुकसान; मामलों में तेज वृद्धि, पर रियल-टाइम हस्तक्षेप से रकम का बड़ा हिस्सा बचा

साइबर अपराध में 24% उछाल, 2025 में भारतीयों को ₹22,495 करोड़ का चूना

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: देश में साइबर अपराध का दायरा तेजी से फैल रहा है। 2025 में कुल 28.15 लाख साइबर अपराध मामले दर्ज हुए, जो 2024 के 22.68 लाख मामलों से करीब 24% अधिक हैं। हालांकि कुल वित्तीय नुकसान ₹22,495 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹22,845 करोड़ से थोड़ा कम है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार यह कमी मुख्यतः बैंकों और पुलिस की रियल-टाइम फंड ब्लॉकिंग और समन्वित कार्रवाई के कारण संभव हुई।

दिलचस्प तथ्य यह है कि मामलों की संख्या बढ़ने के बावजूद एफआईआर घटकर 55,484 रह गई, जबकि 2024 में यह 66,370 थी। अधिकारियों का कहना है कि कई शिकायतों में रकम शुरुआती चरण में ही रोक ली जाती है, जिससे वे औपचारिक एफआईआर तक नहीं पहुंचतीं।

निवेश ठगी बना सबसे बड़ा खतरा

कुल वित्तीय नुकसान का 76% हिस्सा निवेश से जुड़े साइबर फ्रॉड से हुआ। इनमें फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, पोंजी स्कीम, क्रिप्टो निवेश जाल और “हाई रिटर्न” का लालच देने वाले टेलीग्राम-व्हाट्सऐप ग्रुप शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार त्वरित और अधिक लाभ की चाह लोगों को इन जालों में फंसा रही है, जहां कुछ ही दिनों में लाखों रुपये साफ हो जाते हैं।

मामलों की संख्या के लिहाज से भी निवेश ठगी शीर्ष पर रही और कुल मामलों का 35% इसी श्रेणी में दर्ज हुआ।

डिजिटल गिरफ्तारी और सेक्सटॉर्शन भी गंभीर

वित्तीय नुकसान के पैटर्न में डिजिटल गिरफ्तारी ठगी दूसरे स्थान पर रही, जिससे कुल नुकसान का 9% हुआ। इसमें ठग खुद को सीबीआई, ईडी, कस्टम या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर “जांच” के नाम पर रकम ट्रांसफर कराते हैं।
वहीं सेक्सटॉर्शन से 4% नुकसान दर्ज हुआ और यह कुल मामलों का 19% रहा, जिससे यह संख्या के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा अपराध बन गया।

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तकनीक से बढ़ी ठगी की जटिलता

जांच एजेंसियों के मुताबिक साइबर अपराधी अब फिशिंग, रैनसमवेयर, पहचान चोरी और सोशल इंजीनियरिंग जैसे उन्नत तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मल्टी-लेयर मनी म्यूल नेटवर्क और फर्जी बैंक खातों के जरिए रकम मिनटों में देश-विदेश में ट्रांसफर कर दी जाती है।

संस्थागत क्षमता में बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने साइबर अपराध से निपटने के लिए ढांचा मजबूत किया है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) राज्यों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच समन्वय कर रहा है। बैंकों ने अब तक 18.43 लाख संदिग्ध पहचान और 24.67 लाख म्यूल खाते साझा किए हैं, जिनकी मदद से ₹8,031.56 करोड़ की ठगी रोकी गई।

इसके अलावा 2021 में शुरू किए गए सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए 23.02 लाख शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए ₹7,130 करोड़ बचाए गए। देश में समर्पित साइबर थाने भी तेजी से बढ़े हैं—2020 के 169 की तुलना में अब 459 साइबर थाने काम कर रहे हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे है।

चुनौती बनी जागरूकता

आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि साइबर अपराध का दायरा लगातार फैल रहा है। नुकसान की रकम कुछ हद तक नियंत्रित हुई है, लेकिन मामलों की बढ़ती संख्या बताती है कि जन जागरूकता और शुरुआती रिपोर्टिंग अभी भी सबसे बड़ी जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि “जल्दी मुनाफा” और “तुरंत कार्रवाई का दबाव” ठगों के सबसे प्रभावी हथियार बने हुए हैं।

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