भारत में ₹16.6 लाख करोड़ निवेश लाइन में—इंफ्रा, क्लीन एनर्जी, AI मिशन 2.0 से ग्लोबल हब।

दो साल में AI सेक्टर में ₹16.6 लाख करोड़ निवेश की उम्मीद, टेलेंट और जिम्मेदार उपयोग पर जोर

Team The420
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भारत अगले दो वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में करीब ₹16.6 लाख करोड़ (लगभग 200 अरब डॉलर) का निवेश आकर्षित करने की दिशा में बढ़ रहा है। सरकार का कहना है कि यह निवेश एआई स्टैक की सभी प्रमुख परतों—इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूट, डेटा, एप्लिकेशन और टैलेंट—में आएगा, जिससे देश का दीर्घकालिक तकनीकी इकोसिस्टम मजबूत होगा।

नीतिगत स्तर पर जोर केवल निवेश पर ही नहीं, बल्कि एआई के जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग पर भी दिया जा रहा है, ताकि तकनीक के लाभ समाज तक पहुंचें और संभावित जोखिमों को नियंत्रित किया जा सके।

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इंफ्रा और एनर्जी सेक्टर में भारी निवेश रुचि

सरकारी आकलन के मुताबिक, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर—विशेषकर डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और चिप-आधारित संसाधनों—में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की संभावना है। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र भी एआई विस्तार का अहम आधार बनेगा, क्योंकि बड़े कंप्यूट क्लस्टर को स्थिर और स्वच्छ बिजली की आवश्यकता होती है।

भारत की लगभग 51% बिजली क्षमता का स्वच्छ स्रोतों से आना इस दिशा में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ माना जा रहा है। इससे ग्रीन डेटा सेंटर और लो-कार्बन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में मदद मिलेगी।

जिम्मेदार एआई पर वैश्विक सहमति की कोशिश

नीति-निर्माताओं का मानना है कि एआई के विकास के साथ-साथ उसके नैतिक और जवाबदेह उपयोग पर वैश्विक स्तर पर सहमति बनाना जरूरी है। उद्देश्य यह है कि एआई का इस्तेमाल आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और शासन सुधार में हो, जबकि दुरुपयोग, भेदभाव और डेटा जोखिम को रोका जा सके।

भारत इस दिशा में बहुपक्षीय सहयोग और मानक-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।

टेलेंट डेवलपमेंट तीन स्तर पर

एआई परिवर्तन को संभालने के लिए सरकार उद्योग और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर तीन मोर्चों पर काम कर रही है:

1. मौजूदा कार्यबल का री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग

2. नई प्रतिभा की पाइपलाइन तैयार करना

3. भविष्य की पीढ़ियों को एआई-रेडी बनाना

तीन वर्ष पहले शुरू किए गए स्किल कार्यक्रमों को इस लक्ष्य के अनुरूप विस्तारित किया जा रहा है, ताकि आईटी और डिजिटल सेक्टर की मांग के अनुसार मानव संसाधन तैयार हो सके।

AI मिशन 2.0 में कंप्यूट क्षमता बढ़ेगी

सरकार जल्द ही AI मिशन 2.0 लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसमें रिसर्च, इनोवेशन और साझा कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर रहेगा। मौजूदा लगभग 38,000 जीपीयू की क्षमता में 20,000 से अधिक जीपीयू जोड़ने की योजना है, जिससे स्टार्टअप, शोध संस्थान और छोटे उद्यम भी उच्च स्तरीय एआई कंप्यूट तक पहुंच बना सकें।

इस मॉडल का उद्देश्य एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण करना है, ताकि कंप्यूटिंग क्षमता केवल कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे।

भारत बनने की ओर वैश्विक AI हब

बड़े निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, विशाल डिजिटल डेटा, मजबूत आईटी उद्योग और कौशल विकास कार्यक्रमों के संयोजन से भारत को एआई विकास और उपयोग का वैश्विक केंद्र बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

यदि प्रस्तावित निवेश और नीतिगत पहल समय पर लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में एआई देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और औद्योगिक उत्पादकता के प्रमुख चालक के रूप में उभर सकता है।

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