नोएडा: SME आईपीओ की हालिया बाढ़ के बीच कथित अनियमितताओं पर कर विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। Income Tax Department की जांच शाखा ने दिल्ली के मर्चेंट बैंकर कुलभूषण पराशर से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई SME आईपीओ में “गंभीर गड़बड़ियों” के संकेत मिलने के बाद की गई।
छापेमारी का नेतृत्व नोएडा स्थित जांच विंग ने प्रधान आयकर निदेशक (जांच), कानपुर के पर्यवेक्षण में किया। विभागीय सूत्रों ने बताया कि तीन शहरों में फैली करीब 20 लोकेशन पर एक साथ कार्रवाई की गई, जिसमें 200 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।
रिटेल निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच?
अधिकारियों का कहना है कि हाल के महीनों में SME सेगमेंट में लिस्टिंग की रफ्तार तेज रही। इसी दौरान ऐसे इनपुट मिले कि कुछ संस्थाएं आईपीओ को “स्ट्रक्चर्ड टूल” की तरह इस्तेमाल कर अवैध लाभ कमाने की कोशिश कर रही थीं। आरोप है कि रिटेल निवेशकों—खासतौर पर मध्यमवर्गीय निवेशकों—को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर आकर्षित किया गया।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि शेयरों का आवंटन रिश्तेदारों, सहयोगियों और कथित डमी निवेशकों—यहां तक कि घरेलू स्टाफ—के नाम पर किया गया। इन आवंटनों के बदले वास्तविक वित्तीय योगदान न होने की आशंका जताई जा रही है। बाद में इन होल्डिंग्स को पूर्व-नियोजित ट्रांसफर के जरिए कथित वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।
कृत्रिम मांग और बढ़ी कीमतें
सूत्रों का दावा है कि इस तरीके से बाजार में कृत्रिम मांग का माहौल बनाया गया, जिससे शेयर कीमतें ऊपर गईं। ऊंचे वैल्यूएशन देखकर अनजान निवेशक आकर्षित हुए और चुनिंदा समूह ने करोड़ों का मुनाफा कमाया। अधिकारियों के मुताबिक, यह पैटर्न यदि पुष्ट होता है तो यह न केवल कर नियमों बल्कि पूंजी बाजार के नियामकीय ढांचे का भी उल्लंघन हो सकता है।
तलाशी के दौरान कागजी दस्तावेजों के साथ-साथ लैपटॉप, सर्वर बैकअप और अन्य डिजिटल उपकरणों से डेटा जब्त किया गया है। जब्त सामग्री की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि फंड फ्लो, लाभार्थियों की पहचान और कथित समन्वित ट्रेडिंग के सबूतों को खंगाला जा सके।
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सेबी से साझा हो सकती हैं जानकारियां
अधिकारियों ने संकेत दिया कि जांच में सामने आने वाले निष्कर्षों को पूंजी बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (सेबी) और अन्य एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकता है। यदि नियामकीय उल्लंघन साबित होते हैं, तो संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई संभव है—जिसमें जुर्माना, बाजार से प्रतिबंध या आपराधिक कार्यवाही शामिल हो सकती है।
SME सेगमेंट पर बढ़ी नजर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि SME प्लेटफॉर्म छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए पूंजी जुटाने का अहम माध्यम है, लेकिन इसमें तरलता अपेक्षाकृत कम होती है और कीमतों में उतार-चढ़ाव अधिक रहता है। ऐसे में यदि आवंटन और ट्रेडिंग में मिलीभगत हो, तो कीमतों को प्रभावित करना आसान हो सकता है। विशेषज्ञों ने निवेशकों को प्रॉस्पेक्टस, कंपनी की बुनियाद और वैल्यूएशन का स्वतंत्र आकलन करने की सलाह दी है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच अभी शुरुआती चरण में है और दायरा बढ़ सकता है। “कुछ और नाम भी जांच के घेरे में आ सकते हैं,” एक अधिकारी ने कहा। फिलहाल, जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद अगला कदम तय किया जाएगा।
SME आईपीओ में पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा को लेकर यह कार्रवाई एक अहम संकेत मानी जा रही है। बाजार की तेजी के दौर में नियामकीय सख्ती यह संदेश देती है कि अनियमितताओं पर निगरानी और कार्रवाई दोनों जारी रहेंगी।
