ऑडिट नोटिस से निवेशकों में चिंता, IIFL Finance की मार्केट वैल्यू को झटका

Team The420
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मुंबई, 22 जनवरी 2026 | गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) IIFL Finance के शेयरों में गुरुवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जब कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया कि आयकर विभाग ने उसके खातों का विशेष ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। इस खुलासे के बाद शेयर इंट्रा-डे में 13.5% तक लुढ़क गया और कारोबार के अंत में 13% से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे बाजार में नियामकीय जांच को लेकर निवेशकों की चिंता साफ झलकती दिखी।

कंपनी की नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, 21 जनवरी 2026 को आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 142(2A) के तहत एक निर्दिष्ट ब्लॉक अवधि के लिए विशेष ऑडिट का आदेश दिया है। आदेश में आकलन प्रक्रिया में सहायता के लिए एक स्वतंत्र विशेष ऑडिटर की नियुक्ति का भी प्रावधान है। यह सूचना सामने आते ही शेयर पर दबाव बढ़ गया।

प्रबंधन का पक्ष: आरोप नहीं, प्रक्रियात्मक कदम

अर्निंग्स कॉल के बाद कंपनी के प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि विशेष ऑडिट का आदेश किसी भी प्रकार के आरोप, निष्कर्ष या दंडात्मक कार्रवाई के समान नहीं है। प्रबंधन के मुताबिक, बड़े और जटिल लेन-देन वाली वित्तीय संस्थाओं के लिए इस तरह के ऑडिट असामान्य नहीं माने जाते।

कंपनी ने बताया कि यह ऑडिट बहुवर्षीय ब्लॉक अवधि से जुड़ी आयकर आकलन प्रक्रिया का हिस्सा है और फरवरी 2025 में धारा 132 के तहत हुई आयकर तलाशी के बाद की कार्रवाई से संबंधित है। प्रबंधन ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट केवल आकलन के लिए एक इनपुट होगी। इस चरण में न तो कोई कर मांग तय हुई है, न जुर्माना और न ही कोई अंतिम निर्णय। ऑडिट के 60 दिनों के भीतर पूरा होने की संभावना जताई गई है।

IIFL Finance ने यह भी जानकारी दी कि उसे बिहार जीएसटी विभाग से दो और गुजरात जीएसटी विभाग से एक आदेश प्राप्त हुआ है, हालांकि इन मामलों में अब तक किसी भी तरह का भौतिक वित्तीय प्रभाव सामने नहीं आया है।

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दिसंबर तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन

नियामकीय घटनाक्रम के बावजूद, कंपनी के परिचालन नतीजे मजबूत बने हुए हैं। दिसंबर तिमाही (Q3) में समेकित शुद्ध लाभ साल-दर-साल 157% बढ़कर ₹501.4 करोड़ पहुंच गया। परिचालन से आय 40.3% बढ़कर ₹3,427.5 करोड़ रही, जबकि शुद्ध ब्याज आय (NII) 61.1% बढ़कर ₹1,990.2 करोड़ दर्ज की गई।

इस प्रदर्शन का प्रमुख आधार गोल्ड-लोन सेगमेंट रहा। प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (AUM) सालाना आधार पर 189% बढ़कर ₹43,432 करोड़ पहुंचीं। तिमाही-दर-तिमाही आधार पर भी गोल्ड-लोन AUM में 26% की वृद्धि दर्ज की गई, जो सुरक्षित उधारी की ओर कंपनी की रणनीति और मजबूत मांग को दर्शाती है।

एमएसएमई लोन बुक का AUM 17% बढ़कर ₹10,081 करोड़ रहा। इसके विपरीत, माइक्रोफाइनेंस AUM 19% घटकर ₹8,360 करोड़ रह गया, जिसका कारण असुरक्षित उधारी में सुस्ती और व्यापक आर्थिक दबाव बताया गया।

एसेट क्वालिटी और बैलेंस शीट की स्थिति

कंपनी के अनुसार, तिमाही के दौरान एसेट क्वालिटी में निरंतर सुधार देखने को मिला। ग्रॉस एनपीए (GNPA) क्रमिक आधार पर 54 बेसिस प्वाइंट घटकर 1.6%, जबकि नेट एनपीए (NNPA) 27 बेसिस प्वाइंट घटकर 0.8% पर आ गया। सालाना आधार पर GNPA में 82 बेसिस प्वाइंट की गिरावट दर्ज की गई।

तिमाही में रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) 2.1% और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 11.3% रहा। पूंजी पर्याप्तता मजबूत बनी रही, जहां समेकित CRAR 27.7% दर्ज किया गया। दिसंबर के अंत में कंपनी की तरलता ₹9,433 करोड़ रही।

बाजार की नजरें आगे की स्पष्टता पर

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि शेयर में आई तेज गिरावट मुख्य रूप से अल्पकालिक अनिश्चितता और नियामकीय आशंकाओं का परिणाम है। कंपनी की मूल कारोबारी स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन निवेशकों की नजरें अब विशेष ऑडिट की समय-सीमा और उससे निकलने वाली किसी भी टिप्पणी पर टिकी रहेंगी। प्रबंधन ने दोहराया है कि ऑडिट एक प्रक्रियात्मक कदम है, हालांकि आने वाले हफ्तों में नियामकीय स्पष्टता ही शेयर की आगे की दिशा तय करेगी।

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