गोवा में साइबर ठगी पर डिजिटल वार: ₹1 लाख तक की साइबर ठगी में E-Zero FIR लागू

Team The420
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पणजी | साइबर अपराध से निपटने की दिशा में गोवा सरकार एक बड़ा डिजिटल सुधार लागू करने जा रही है। राज्य में ₹1 लाख तक की साइबर ठगी के मामलों के लिए e-Zero FIR प्रणाली शुरू की जाएगी, जिसके तहत पीड़ित राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराते ही FIR अपने आप दर्ज हो जाएगी। इस व्यवस्था से पुलिस स्टेशन जाने की अनिवार्यता खत्म होगी और शुरुआती कार्रवाई में होने वाली देरी पर रोक लगेगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह पहल ऐसे समय की जा रही है जब गोवा में ऑनलाइन भुगतान धोखाधड़ी, फर्जी कॉल सेंटर, फिशिंग, OTP फ्रॉड और डिजिटल प्रतिरूपण से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नई प्रणाली का उद्देश्य शिकायत दर्ज करने से लेकर जांच शुरू होने तक की समय-सीमा को न्यूनतम करना है।

अब शिकायत से FIR तक का रास्ता होगा सीधा

नई व्यवस्था के तहत, जैसे ही कोई नागरिक 1930 हेल्पलाइन पर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज करेगा, वह शिकायत स्वचालित रूप से e-Zero FIR में बदल जाएगी। इसके बाद कानूनी और जांच प्रक्रिया बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के शुरू हो सकेगी।

अधिकारियों का कहना है कि अभी कई मामलों में शिकायत और FIR दर्ज होने के बीच का समय अंतराल अपराधियों को पैसा निकालने या ट्रांजैक्शन छिपाने का मौका दे देता है। e-Zero FIR इस अंतराल को खत्म करने के लिए लाई जा रही है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “साइबर अपराध में सबसे अहम चीज़ समय है। शुरुआती कुछ घंटे ही तय करते हैं कि पैसा वापस आएगा या नहीं।”

पैसे फ्रीज करने में मिलेगी बढ़त

e-Zero FIR का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बैंकों और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के साथ तुरंत समन्वय संभव हो सकेगा। FIR दर्ज होते ही संबंधित खातों को फ्रीज करने, संदिग्ध ट्रांजैक्शन रोकने और डिजिटल सबूत सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रणाली से जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। हर शिकायत डिजिटल रूप से दर्ज, टाइम-स्टैम्प और ट्रैक की जाएगी, जिससे शुरुआती स्तर पर लापरवाही या देरी की गुंजाइश कम होगी।

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साइबर क्राइम यूनिट्स को शिकायतें रियल टाइम में मिलेंगी, जिससे केस आवंटन और फॉलो-अप तेज़ होगा।

टेक्नोलॉजी-आधारित पुलिसिंग की दिशा में कदम

e-Zero FIR को गोवा की टेक्नोलॉजी-संचालित प्रशासनिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हाल के वर्षों में साइबर अपराध आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है, जिसमें छात्र, बुज़ुर्ग, नौकरीपेशा और कारोबारी सभी प्रभावित हो रहे हैं।

अधिकारियों का मानना है कि यह प्रणाली खासतौर पर उन पीड़ितों के लिए मददगार होगी, जो थाने जाने की जटिल प्रक्रिया या लंबी कानूनी कार्रवाई के डर से शिकायत दर्ज कराने से हिचकते हैं।

एक अधिकारी ने कहा, “लक्ष्य यह है कि सिस्टम नागरिकों के लिए सरल, संवेदनशील और भरोसेमंद बने।”

सीमा और भविष्य की योजना

फिलहाल e-Zero FIR की सुविधा ₹1 लाख तक की साइबर ठगी के मामलों तक सीमित रहेगी। बड़े और जटिल मामलों में अतिरिक्त जांच और भौतिक सत्यापन की आवश्यकता बनी रह सकती है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह सीमा इसलिए तय की गई है क्योंकि अधिकांश शिकायतें छोटे और मध्यम राशि की होती हैं, जो कुल मिलाकर नागरिकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, लेकिन अक्सर तेजी से आगे नहीं बढ़ पातीं।

अनुभव और फीडबैक के आधार पर भविष्य में इस दायरे का विस्तार किया जा सकता है।

साइबर अपराधों में बढ़ती चिंता

गोवा में फर्जी कस्टमर केयर कॉल, निवेश धोखाधड़ी, OTP साझा कराने और सोशल मीडिया प्रतिरूपण जैसे मामलों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत दर्ज करने में हर घंटे की देरी से रिकवरी की संभावना घटती जाती है।

e-Zero FIR मॉडल इस चुनौती का सीधा समाधान पेश करता है, जिससे शिकायत से कार्रवाई तक का समय काफी घटेगा।

जागरूकता होगी सफलता की कुंजी

अधिकारियों ने जोर दिया कि इस प्रणाली की सफलता जन-जागरूकता पर निर्भर करेगी। नागरिकों से अपील की गई है कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें और देरी न करें।

प्रशासन का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज कराने से न केवल पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ती है, बल्कि अपराधियों तक पहुंचने में भी मदद मिलती है।

e-Zero FIR के साथ गोवा उन राज्यों की कतार में शामिल हो जाएगा, जो डिजिटल युग में नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इस नई व्यवस्था के क्रियान्वयन और विस्तृत दिशा-निर्देशों को लेकर औपचारिक अधिसूचना जल्द जारी होने की संभावना है।

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