नई दिल्ली | अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अमेरिका के शीर्ष वॉल स्ट्रीट वकीलों में शुमार एक वरिष्ठ अधिवक्ता को अपने बचाव के लिए नियुक्त किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) अपने लंबे समय से अटके सिविल मुकदमे को आगे बढ़ाने की कोशिशों में जुटा है। बाजार और कानूनी हलकों में इसे संकेत माना जा रहा है कि मामला अब सक्रिय चरण में प्रवेश कर सकता है।
अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, गौतम अडानी ने रॉबर्ट जिउफ्रा जूनियर को अपना वकील नियुक्त किया है। जिउफ्रा प्रतिष्ठित अमेरिकी लॉ फर्म सुलिवन एंड क्रॉमवेल में सीनियर पार्टनर और को-चेयर हैं और हाई-प्रोफाइल फाइनेंशियल मामलों में उनकी मजबूत पहचान मानी जाती है। यह नियुक्ति ऐसे वक्त पर सामने आई है, जब SEC पारंपरिक तरीकों से समन सर्व न हो पाने के बाद वैकल्पिक माध्यमों की अनुमति अदालत से मांग रहा है।
2024 में दर्ज हुआ था SEC का सिविल केस
SEC ने नवंबर 2024 में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर किया था। आरोप है कि दोनों ने अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड से जुड़ी जानकारियों को लेकर अमेरिकी निवेशकों के सामने गलत और भ्रामक बयान दिए, जिससे अमेरिकी सिक्योरिटीज कानूनों का उल्लंघन हुआ।
हालांकि, मुकदमा दायर होने के एक साल से अधिक समय बाद भी यह केस आगे नहीं बढ़ पाया। इसकी मुख्य वजह यह रही कि दोनों आरोपी भारत में हैं और उन्हें अब तक औपचारिक रूप से समन सर्व नहीं किया जा सका।
समन सर्विस बनी बड़ी बाधा
अमेरिकी कानून के तहत किसी भी सिविल मुकदमे की सुनवाई तब तक आगे नहीं बढ़ सकती, जब तक आरोपियों को विधिवत नोटिस नहीं दिया जाता। SEC का कहना है कि भारत में समन सर्व कराने के प्रयास सफल नहीं हो सके।
पिछले सप्ताह SEC ने न्यूयॉर्क की एक फेडरल अदालत से अनुरोध किया कि उसे ई-मेल या अमेरिका में अडानी पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रही लॉ फर्मों के जरिए दस्तावेज़ भेजने जैसे वैकल्पिक तरीकों से समन देने की अनुमति दी जाए।
SEC की इस पहल की खबर सामने आने के बाद अडानी ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में दबाव देखा गया। 23 जनवरी को समूह के शेयरों से संयुक्त रूप से करीब 13 अरब डॉलर का बाजार मूल्य घट गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
हाई-प्रोफाइल वकील की एंट्री
रॉबर्ट जिउफ्रा की नियुक्ति को इस मामले में अहम मोड़ माना जा रहा है। वह अमेरिका में सिक्योरिटीज और कॉरपोरेट मुकदमों के दिग्गज वकील माने जाते हैं और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों व बड़े वित्तीय संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
SEC के अनुसार, जिउफ्रा ने एजेंसी से संपर्क कर यह स्पष्ट किया है कि वह गौतम अडानी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और आरोपियों की ओर से समन स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अदालत से यह भी आग्रह किया कि चूंकि दोनों आरोपी अमेरिका से बाहर हैं, इसलिए प्रक्रिया पर बातचीत के लिए कुछ अतिरिक्त समय दिया जाए।
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अब अदालत से जल्द ही यह तय करने की उम्मीद है कि SEC को वैकल्पिक तरीकों से समन देने की अनुमति मिलेगी या नहीं।
क्रिमिनल केस भी है लंबित
SEC के सिविल केस के अलावा, न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में अमेरिकी फेडरल अभियोजकों ने एक अलग आपराधिक मामला भी दर्ज किया है। इसमें आरोप है कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े अनुबंध हासिल करने के लिए भारत में कथित तौर पर 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना में मदद की गई।
यह आपराधिक मामला भी पिछले एक साल से अधिक समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है और इसमें कोई बड़ा घटनाक्रम सामने नहीं आया है।
ग्रुप कंपनियां नहीं हैं आरोपी
महत्वपूर्ण बात यह है कि SEC के सिविल मुकदमे में अडानी ग्रुप या उसकी किसी सूचीबद्ध कंपनी को आरोपी नहीं बनाया गया है। मामला केवल गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से दर्ज किया गया है।
अडानी ग्रुप की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। वहीं, SEC और जिउफ्रा ने भी मीडिया सवालों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है।
आगे क्या?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अदालत SEC को वैकल्पिक तरीके से समन सर्व करने की अनुमति देती है, तो यह केस के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। इससे पहली बार मुकदमा औपचारिक रूप से सुनवाई के चरण में प्रवेश कर सकेगा।
निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम एक नई अनिश्चितता जोड़ता है, जबकि अडानी ग्रुप बीते वर्षों की जांच और दबाव के बाद बाजार में भरोसा बनाए रखने की कोशिशों में जुटा हुआ है। वॉल स्ट्रीट के शीर्ष वकील की एंट्री से साफ है कि यह कानूनी लड़ाई अब निर्णायक दौर की ओर बढ़ रही है।
