फर्जी लोन का खेल: ₹33.44 लाख का नोटिस आते ही खुला बैंक घोटाले का राज

Team The420
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यूपी कोऑपरेटिव बैंक की बड़गांव शाखा में फर्जी लोन का बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति के नाम पर बिना उसकी जानकारी के ₹33.44 लाख का कर्ज स्वीकृत कर रकम निकाल ली गई। पीड़ित को पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब बैंक की ओर से वसूली नोटिस उसके घर पहुंची। अदालत के आदेश पर पूर्व शाखा प्रबंधक और एक बिचौलिए के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

धानेपुर क्षेत्र के उत्तरी शुकुलपुरवा निवासी पीड़ित ने शिकायत में बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात राघवराम उर्फ रग्घू से हुई, जिसने बैंक से लोन दिलाने का भरोसा दिया। पीड़ित ने साफ कहा कि उसके नाम कोई जमीन नहीं है, जिस पर आरोपी ने खुद कागज और बैनामा तैयार कराने तथा आयकर रिटर्न बनवाने की बात कही। भरोसे में लेकर उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड की कॉपी और फोटो ले लिए।

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इसके बाद बिचौलिया उसे बैंक शाखा ले गया और तत्कालीन शाखा प्रबंधक से मिलवाया। कुछ कागजी प्रक्रिया कराई गई और बताया गया कि लोन पास हो जाएगा। चार दिन बाद जब पीड़ित बैंक पहुंचा तो उसे कहा गया कि सामान्य वर्ग के लिए लोन प्रक्रिया फिलहाल बंद है। वह निराश होकर लौट आया और मामले को वहीं खत्म समझ लिया।

करीब एक साल बाद 15 अक्तूबर 2025 को बैंक से ₹33,44,160 की वसूली नोटिस उसके घर पहुंची। नोटिस देखकर वह बैंक पहुंचा और आपत्ति जताई कि उसने कोई लोन लिया ही नहीं। आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने उसके साथ अभद्रता की और भगा दिया। इसके बाद पीड़ित ने अदालत की शरण ली, जहां से केस दर्ज करने के आदेश हुए।

नगर कोतवाली पुलिस ने पूर्व शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल और राघवराम उर्फ रग्घू के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहले भी करोड़ों के घोटाले में नाम

उक्त पूर्व शाखा प्रबंधक पहले ही बैंक में हुए ₹21.47 करोड़ के घोटाले में गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में स्पेशल ऑडिट और आंतरिक जांच के बाद 12 जनवरी को तीन तत्कालीन शाखा प्रबंधकों समेत 16 लोगों पर केस दर्ज हुआ था। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि फर्जी लोन, कागजी संपत्ति और फर्जी आईटीआर के जरिए कई खातों में रकम निकाली गई।

जांच के दायरे में आ सकते हैं और खाते

पुलिस और बैंक की आंतरिक टीम अब उन सभी लोन खातों की जांच कर रही है जो उसी अवधि में स्वीकृत हुए थे। आशंका है कि इसी तरह कई अन्य लोगों के नाम पर भी फर्जी ऋण निकाले गए हो सकते हैं।

बैंकों की लोन प्रक्रिया पर सवाल

इस घटना ने सहकारी बैंकिंग प्रणाली में केवाईसी, संपत्ति सत्यापन और आंतरिक नियंत्रण की कमजोरियों को उजागर किया है। बिना वास्तविक उधारकर्ता की उपस्थिति के लोन स्वीकृत होना और रकम निकल जाना गंभीर लापरवाही या मिलीभगत की ओर संकेत करता है।

क्या करें यदि आपके नाम पर फर्जी लोन निकल जाए

  • तुरंत संबंधित बैंक शाखा में लिखित आपत्ति दें
  • अपने सिबिल और लोन स्टेटमेंट की जांच करें
  • पुलिस में शिकायत और अदालत का सहारा लें
  • आधार, पैन और दस्तावेज की कॉपी अनजान लोगों को न दें

मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेज और ट्रांजेक्शन ट्रेल खंगाले जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद अन्य आरोपियों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।

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