वॉशिंगटन | दिवंगत वित्तीय कारोबारी और दोषी यौन अपराधी जेफ़्री एपस्टीन से जुड़े संघीय जांच रिकॉर्ड के एक नए बड़े हिस्से के सार्वजनिक होने से कई प्रभावशाली हस्तियों के नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इस खुलासे ने पारदर्शिता, जवाबदेही और पीड़ितों की सुरक्षा को लेकर बहस को नया जोर दिया है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन जांच से जुड़े 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज़ सार्वजनिक किए हैं। इनमें ईमेल, उड़ान लॉग, टिप-ऑफ और वर्षों में एकत्र की गई डिजिटल सामग्री शामिल है। इसे अब तक की सबसे बड़ी रिलीज़ में से एक बताया जा रहा है, जिसमें राजनीतिक नेताओं, तकनीकी उद्योग के दिग्गजों, शाही परिवारों और सांस्कृतिक जगत से जुड़ी हस्तियों के संदर्भ मौजूद हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज़ों में किसी का नाम होना आपराधिक कृत्य का प्रमाण नहीं है। विभाग के अनुसार, इन फाइलों में कई ऐसे अप्रमाणित सुझाव, पत्राचार और तीसरे पक्ष के दावे शामिल हैं, जिनकी जांच पहले ही की जा चुकी है और जिन्हें असत्य या अविश्वसनीय पाया गया था।
जिन प्रमुख नामों का उल्लेख हुआ है, उनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स और टेस्ला व स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क शामिल हैं। इसके अलावा ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू और फिल्म निर्माता मीरा नायर का भी जिक्र दस्तावेज़ों में मिलता है।
न्याय विभाग के अनुसार, इस विशाल संग्रह को संकलित करने और समीक्षा करने में सैकड़ों वकीलों और कानूनी विशेषज्ञों को लगाया गया। इस डेटा में 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1.80 लाख तस्वीरें शामिल हैं, साथ ही विभिन्न स्रोतों से जुटाए गए ईमेल और नोट्स भी मौजूद हैं।
ट्रंप से जुड़े मामलों में, फाइलों में मुख्य रूप से एफबीआई को मिले गुमनाम कॉल और इलेक्ट्रॉनिक टिप्स का उल्लेख है। विभाग ने कहा कि इनमें से कुछ आरोप 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले लगाए गए थे और उन्हें “असत्य और सनसनीखेज” पाया गया। अधिकारियों ने दोहराया कि इन दावों की पहले ही जांच कर उन्हें खारिज किया जा चुका है।
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दस्तावेज़ों में एपस्टीन द्वारा लिखा गया एक ड्राफ्ट ईमेल भी शामिल है, जिसमें बिल गेट्स के निजी जीवन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इसमें कथित तौर पर नशीली दवाओं की व्यवस्था और निजी संबंधों में मदद का जिक्र है। गेट्स पहले स्वीकार कर चुके हैं कि उनकी एपस्टीन से पेशेवर मुलाकात हुई थी, लेकिन उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। न्याय विभाग ने कहा कि यह ईमेल एपस्टीन के दावों को दर्शाता है, न कि स्थापित तथ्यों को।
2012 के कुछ ईमेल भी चर्चा में हैं, जिनसे एपस्टीन और एलन मस्क के बीच संपर्क का संकेत मिलता है। इनमें निजी द्वीप पर यात्रा और कार्यक्रम को लेकर बातचीत दिखाई देती है। हालांकि, जारी सामग्री में इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि ऐसी यात्रा वास्तव में हुई या किसी तरह की अवैध गतिविधि में मस्क शामिल थे।
एक और दस्तावेज़ में 2002 का एक ईमेल शामिल है, जो एपस्टीन की सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल को संबोधित है और “लव, मेलानिया” के हस्ताक्षर के साथ है। हालांकि, इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है और अधिकारियों का कहना है कि केवल नाम का उल्लेख लेखक की पहचान का प्रमाण नहीं हो सकता।
इन हाई-प्रोफाइल नामों के सामने आने के बाद एपस्टीन की पीड़ित महिलाओं और उनके समर्थकों में नाराज़गी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह के खुलासे न्याय से ज्यादा सनसनी पर ध्यान केंद्रित करते हैं और पीड़ितों की गोपनीयता को खतरे में डालते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आए बयानों में पीड़ितों ने कहा कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करना उन्हें दोबारा मानसिक आघात पहुंचा सकता है, जबकि जिन लोगों ने शोषण को संभव बनाया, वे अब भी पर्दे में हैं।
न्याय विभाग ने कहा कि यह कदम पारदर्शिता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, लेकिन दस्तावेज़ों को समझने के लिए संदर्भ और गहन विश्लेषण जरूरी है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ये रिकॉर्ड निष्कर्ष नहीं, बल्कि कच्ची जानकारी हैं और इन्हें सावधानी से पढ़ा जाना चाहिए।
जैसे-जैसे यह दस्तावेज़ी खुलासा सुर्खियां और अटकलें बढ़ा रहा है, जांचकर्ता और पीड़ितों के समर्थक एक बात पर जोर दे रहे हैं—फाइल में नाम होना फैसला नहीं होता। असली चुनौती यह है कि अप्रमाणित दावों और सिद्ध तथ्यों के बीच फर्क किया जाए, ताकि पारदर्शिता की कोशिशें एपस्टीन के पीड़ितों की आवाज़ को दबा न दें।
