मुंबई | खुद को पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाने वाले साइबर ठगों ने मुंबई के एक 85 वर्षीय बुजुर्ग से ₹1.27 करोड़ की ठगी कर ली। इस मामले में जांच एजेंसियों ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जबकि पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जांच जारी है।
पीड़ित, जो एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, अंधेरी (जुहू–वर्सोवा लिंक रोड) इलाके में रहते हैं। पुलिस के अनुसार, अक्टूबर 2025 में उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को बेंगलुरु पुलिस से जुड़ा अधिकारी बताया। कॉलर ने दावा किया कि पीड़ित के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े लेनदेन हुए हैं और इस मामले में ₹75 लाख की संदिग्ध राशि की जांच चल रही है।
कॉलर ने बुजुर्ग को बताया कि यह मामला दिल्ली पुलिस और CBI द्वारा संयुक्त रूप से देखा जा रहा है और किसी भी समय उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। इतना ही नहीं, कॉलर ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सहयोग नहीं किया गया तो परिवार को कानूनी परेशानी झेलनी पड़ सकती है और उनके बेटे की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।
इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने संपर्क किया, जिसने खुद को CBI अधिकारी बताते हुए वीडियो कॉल किया। वीडियो कॉल के दौरान उसने कथित तौर पर एफआईआर और गिरफ्तारी वारंट दिखाए। पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज भी भेजे गए, जिससे पूरा मामला वास्तविक जांच जैसा लगे।
लगातार डर और दबाव में आए बुजुर्ग ने ठगों द्वारा दिए गए बैंक खाते में 2 दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच अलग-अलग ट्रांजैक्शनों में कुल ₹1.27 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने के बाद यह रकम उन्हें लौटा दी जाएगी।
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हालांकि, पैसे ट्रांसफर होने के बाद कॉल करने वाले अचानक संपर्क से बाहर हो गए। इस पर पीड़ित ने अपने एक मित्र से बात की, जिसने उन्हें साइबर फ्रॉड की आशंका जताई और साइबर हेल्पलाइन के जरिए शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। इसके बाद मामला साइबर सेल तक पहुंचा।
जांच के दौरान पुलिस ने जिस बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर हुए थे, उसके खाताधारक की पहचान परशुराम दशरथ जगताप के रूप में की। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी ने कथित तौर पर अपना बैंक खाता साइबर फ्रॉड गिरोह को उपलब्ध कराया, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम जमा कराने के लिए किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की पूछताछ जारी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड का एक典型 उदाहरण है, जिसमें ठग कानून प्रवर्तन एजेंसियों का नाम लेकर बुजुर्गों और आम नागरिकों को मानसिक दबाव में लाकर पैसे वसूलते हैं। इस तरह के मामलों में असली गिरफ्तारी या जांच की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि केवल डर पैदा कर रकम ऐंठी जाती है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी पुलिस या केंद्रीय एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे नहीं मांगती। किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई की सूचना लिखित नोटिस के माध्यम से दी जाती है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, CBI या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे की मांग करता है, तो उसे तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना चाहिए।
इस मामले में जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या यह गिरोह देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड को अंजाम दे चुका है।
