देवरिया में ₹2.79 करोड़ की स्टाम्प चोरी पकड़ी, टोल कंपनी पर केस दर्ज

Team The420
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राष्ट्रीय राजमार्ग-28 पर हेतिमपुर टोल प्लाजा की वसूली से जुड़े अनुबंध में ₹2.79 करोड़ की स्टाम्प चोरी का मामला सामने आया है। निबंधन विभाग की प्रवर्तन जांच में अनियमितता पकड़ में आने के बाद टोल संचालक कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

₹100 के स्टाम्प पर करोड़ों का अनुबंध

जांच में पाया गया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और इंदौर की कंपनी मेसर्स हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बीच टोल वसूली का अनुबंध केवल ₹100 के स्टाम्प पेपर पर किया गया, जबकि अनुबंध की वित्तीय राशि करोड़ों में है।

नियमों के अनुसार यदि डीड का विधिवत पंजीकरण कराया जाता तो उस पर 2 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क और 2 प्रतिशत विकास शुल्क लगना था, जिसकी कुल राशि ₹2 करोड़ 79 लाख बैठती है।

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₹59.77 करोड़ की एक साल की वसूली

कंपनी को एक वर्ष के लिए टोल वसूली का अधिकार दिया गया था और उसे एनएचएआई को ₹59.77 करोड़ की कंसेशन फीस जमा करनी है। इतने बड़े अनुबंध को न्यूनतम स्टाम्प पर निष्पादित करना स्टाम्प एवं पंजीयन कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना गया है।

एआईजी निबंधन की शिकायत पर कार्रवाई

एआईजी निबंधन अजय धर्मराज सिंह ने प्रवर्तन के दौरान स्टाम्प चोरी पकड़ने के बाद जिलाधिकारी के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। विभाग ने बकाया स्टाम्प शुल्क की वसूली और नियमानुसार जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

एनएचएआई ने क्या कहा

एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अनुबंध दिल्ली स्थित कार्यालय में निष्पादित होते हैं। यदि संबंधित कंपनी ने निर्धारित स्टाम्प शुल्क जमा नहीं किया है तो राज्य का निबंधन विभाग कानून के तहत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

राजस्व हानि की जांच

अधिकारियों के अनुसार इस मामले से राज्य को सीधे राजस्व का नुकसान हुआ है। अब यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसी प्रकार के अन्य टोल या इंफ्रास्ट्रक्चर अनुबंधों में भी कम स्टाम्प पर डीड निष्पादित की गई है।

कानूनी परिणाम संभव

स्टाम्प कानूनों के तहत कम शुल्क पर दस्तावेज निष्पादित करने पर बकाया राशि की वसूली, भारी जुर्माना और अभियोजन तक की कार्रवाई हो सकती है। अनुबंध से जुड़े पक्षों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

आगे की कार्रवाई

निबंधन विभाग अनुबंध से जुड़े वित्तीय और दस्तावेजी रिकॉर्ड का परीक्षण कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद कंपनी को नोटिस जारी कर रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भविष्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और कंसेशन अनुबंधों की स्टाम्प जांच और सख्त की जाएगी, ताकि इस तरह की राजस्व चोरी पर रोक लगाई जा सके।

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