जगदलपुर/दंतेवाड़ा: वर्क-फ्रॉम-होम और टास्क बेस्ड ऑनलाइन कमाई का झांसा देकर ₹7.91 लाख की साइबर ठगी करने वाले आरोपी को दंतेवाड़ा पुलिस ने गुजरात के जामनगर से गिरफ्तार किया है। वित्तीय ट्रांजैक्शन के लिए 100 से अधिक बैंक खातों का विश्लेषण करने और साइबर फॉरेंसिक जांच के बाद आरोपी तक पहुंच बनाई गई।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान भगद अकरम, निवासी जामनगर (गुजरात) के रूप में हुई है। उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। मामले में थाना बचेली में बीएनएस की धारा 318(4), 111(1)(3) और आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार, बचेली निवासी शिकायतकर्ता और उसके साथियों को मार्च से जून 2025 के बीच सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क किया गया। आरोपी ने खुद को एक कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए टास्क-आधारित वर्क-फ्रॉम-होम ऑफर दिया, जिसमें छोटे-छोटे ऑनलाइन कार्य पूरे करने पर रकम दोगुनी करने का दावा किया गया।
शुरुआत में आरोपी ने छोटे टास्क पर मामूली रकम लौटाकर भरोसा जीत लिया। इसके बाद बड़े टास्क के नाम पर अधिक निवेश करने को कहा गया। पीड़ितों ने बताए गए बैंक खातों में बार-बार पैसे ट्रांसफर किए, लेकिन एक निश्चित रकम के बाद आरोपी ने नंबर ब्लॉक कर दिया और संपर्क समाप्त कर दिया।
जांच के दौरान साइबर सेल, गीदम और बचेली थाने की संयुक्त टीम ने 100 से अधिक बैंक खातों के ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया। फाइनेंशियल ट्रेल, मोबाइल नंबरों की लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की मौजूदगी जामनगर में चिन्हित की गई। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस ने बताया कि आरोपी विभिन्न बैंक खातों का उपयोग कर लेयरिंग के माध्यम से रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करता था ताकि ट्रांजैक्शन ट्रेल जटिल हो जाए और पहचान छिपी रहे। प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि वह संगठित साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है और अन्य खातों के माध्यम से भी ठगी की रकम घुमाई गई है।
डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि अन्य संभावित पीड़ितों, सहयोगियों और वित्तीय लाभार्थियों की पहचान की जा सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने अलग-अलग राज्यों में इसी तरह के टास्क-आधारित वर्क-फ्रॉम-होम स्कैम को अंजाम दिया।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, टास्क-आधारित कमाई और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें ठग पहले छोटे भुगतान कर भरोसा बनाते हैं, फिर बड़ी रकम निवेश कराने के बाद गायब हो जाते हैं। कई मामलों में फर्जी कंपनियों के नाम और नकली डैशबोर्ड का इस्तेमाल कर पीड़ितों को वास्तविक काम का भ्रम दिया जाता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब, टास्क या निवेश के नाम पर दोगुनी कमाई का लालच देने वाले प्रस्तावों से सावधान रहें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी, बैंक डिटेल या पैसे ट्रांसफर करने से पहले कंपनी की सत्यता की जांच करें।
साइबर ठगी का संदेह होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करने और नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है, ताकि समय रहते बैंक खातों को फ्रीज कर नुकसान कम किया जा सके।
मामले की जांच जारी है और पुलिस को आशंका है कि वित्तीय ट्रेल के आधार पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
