छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने अपने नाम से संचालित पांच फर्जी वेबसाइटों की पहचान कर सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। इन पोर्टलों पर एडमिशन, रिजल्ट और अन्य शैक्षणिक सेवाएं उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा था। विश्वविद्यालय ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से कहा है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट csjmu.ac.in का ही उपयोग करें और मिलते-जुलते डोमेन से बचें।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक फर्जी वेबसाइटों का डिजाइन, लोगो और फोटो असली पोर्टल से मिलते-जुलते बनाए गए थे, ताकि वे पूरी तरह प्रामाणिक लगें। इन पर एडमिशन फॉर्म, रिजल्ट लिंक और अन्य प्रक्रियाएं दिखाकर उपयोगकर्ताओं से व्यक्तिगत जानकारी और शुल्क लेने की आशंका है।
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प्रशासन ने इन पांचों वेबसाइटों को अपनी आधिकारिक साइट पर फर्जी घोषित करते हुए किसी भी प्रकार की जानकारी भरने या भुगतान करने से मना किया है। आशंका जताई जा रही है कि इन पोर्टलों का इस्तेमाल फर्जी मार्कशीट बनाने या सत्यापन से बचने के लिए किया जा सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बताया गया कि हाल के महीनों में पुलिस की ओर से संदिग्ध मार्कशीटों के सत्यापन के लिए आए अनुरोधों के बाद विश्वविद्यालय ने जांच शुरू की, जिससे इन क्लोन वेबसाइटों का पता चला। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस जांच और दस्तावेज सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनका उपयोग फर्जी शैक्षणिक रिकॉर्ड बनाने में हुआ या नहीं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि एडमिशन और रिजल्ट के समय इस तरह के फर्जी शिक्षा पोर्टल तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। धोखेबाज छोटे स्पेलिंग बदलाव वाले डोमेन लेकर असली वेबसाइट की सामग्री कॉपी कर लेते हैं और भुगतान गेटवे जोड़ देते हैं, जिससे छात्र भ्रमित हो जाते हैं।
विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि वे किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले यूआरएल की जांच करें, सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप से मिले लिंक का उपयोग न करें और लॉगिन डिटेल, आधार नंबर या बैंक संबंधी जानकारी किसी थर्ड-पार्टी साइट पर साझा न करें।
मामले को साइबर क्राइम प्राधिकरण को भेजे जाने की संभावना है, ताकि फर्जी डोमेन बंद कराए जा सकें और संचालकों का पता लगाया जा सके। विश्वविद्यालय ने कहा है कि आगे भी निगरानी जारी रहेगी और नई संदिग्ध वेबसाइट मिलने पर तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा।
इस घटनाक्रम ने डेटा सुरक्षा और शैक्षणिक धोखाधड़ी को लेकर चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन बाहरी छात्रों के लिए जो ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एडमिशन और रिजल्ट देखते हैं। विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उसके नाम और डिजिटल संसाधनों के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
